Union Budget 2023: यूनियन बजट 2023 एक फरवरी को पेश होना है। ऐसी उम्मीद है कि बजट में सरकार इनकम टैक्स नियमों में बदलाव कर सकती है। सरकार बजट में मिडिल क्लास और टैक्सपेयर्स को छूट दे सकती है। ऐसी उम्मीद है कि सरकार बजट में 5 बड़े बदलाव कर सकती है। बजट 2023 से उम्मीद की जा रही है कि सरकार बजट में टैक्स छूट बढ़ा सकती है।
सैलरी क्लास का टैक्स में काफी योगदान होता है। सैलरी क्लास की सालाना 2.5 लाख रुपये तक की आय टैक्स फ्री होती है। उसके बाद 50,000 रुपये की स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है। उसके बाद इनकम टैक्स स्लैब के मुताबिक उन पर टैक्स लगाया जाता है। हालांकि, उनका वेतन भी टैक्स फ्री होता है यदि यह एक साल में 5 लाख रुपये तक कमाते हैं। हालांकि, यह सेक्शन 87A के तहत छूट है, एक्जेम्पशन नहीं है। अगर सैलरी एक साल में 5 लाख रुपये से ऊपर जाती है तो 2.5 लाख रुपये की छूट की सीमा को छोड़कर पूरी रकम पर टैक्स लागू होगा। अब सैलरी क्लास छूट की सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की मांग कर रहा है।
टैक्स डिडक्शन की लिमिट बढ़ाई जाए
सैलरी क्लास को 80सी के अलावा 80D और 80E के तहत कुछ छूट मिलती है। केंद्रीय बजट 2023-24 में धारा 80C के तहत कटौती की सीमा को मौजूदा 1.5 लाख रुपये से बढ़ाने की मांग की जा रही है। रियल एस्टेट सेक्टर भी सरकार से धारा 80C के अलावा रियल्टी खरीदने के लिए प्रिंसिपल को 80C से निकालने की डिमांड कर रहा है। 80सी की लिमिट को काफी समय से सरकार ने नहीं बढ़ाया है। सैलरी क्लास इसे बढ़ाने की मांग कर रहा है।
होम लोन पर मिले टैक्स छूट
होम लोन के मूल और ब्याज पेमेंट पर टैक्स छूट बढ़ाए जाने की मांग सैलरी क्लास कर रहा है। टैक्स एक्सपर्ट के मुताबिक होम लोन इंटरेस्ट पर 2 लाख रुपये तक टैक्स छूट का दावा किया जा सकता है। अगर बीते 5 से 6 सालों को देखा जाए तो प्रॉपर्टी की कीमतों में काफी इजाफा हुआ है। इस कारण लोगों को घर के लिए लोन भी ज्यादा लेना पड़ता है। सरकार को इस छूट को बढ़ाने की जरूरत है। सरकार को इसे बढ़ाकर 3 लाख रुपये करना चाहिए।
उम्मीदें यह भी हैं कि सरकार बजट 2023 के माध्यम से बाजार में रिटेल म्यूचुअल फंड और स्टॉक निवेशकों को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (LTCG) में राहत देगी। इक्विटी पर LTCG को हटाना फायदेमंद होगा क्योंकि इससे इक्विटी में निवेश बढ़ेगा। अभी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स 10 फीसदी है, जब गेन एक फाइनेंशियल ईयर में 1 लाख रुपये से ज्यादा हो। वहीं, सरकार को STCG पर भी टैक्स छूट देनी होगी।
इंश्योरेंस पर अलग मिले टैक्स छूट
बीमा पर सरकार को टैक्स इंसेंटिव देना चाहिए। केंद्रीय बजट में नागरिकों और देश की बेहतरी के लिए बड़े पैमाने पर नए सुधार पेश करने की जरूरत है। कोविड के बाद बीमा करवरेज की जरूरत सबसे ज्यादा बढ़ी है। ऐसे में सरकार को जीवन बीमा प्रीमियम के लिए एक अलग से टैक्स कटौती का विकल्प देना चाहिए।