Budget 2023: जानिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट से टेलीकॉम सेक्टर को क्या-क्या हैं उम्मीदें

टेलीकॉम सेक्टर ने फाइनेंस मिनिस्टर को बजट को लेकर अपनी उम्मीदों के बारे में बता दिया है। सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) ने सरकार से लाइसेंस फीस में कमी करने की मांग की है

अपडेटेड Nov 23, 2022 पर 1:31 PM
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) अगले साल 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी।

Budget 2023: यूनियन बजट (Union Budget) पेश होने में ज्यादा समय नहीं रह गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) अगले साल 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी। इस बजट से इंडस्ट्री के हर सेक्शन को बहुत उम्मीदें हैं। यह ऐसे वक्त पेश होने जा रहा है, जब दुनिया पर मंडराते मंदी के खतरे के बीच इंडियन इकोनॉमी (Indian Economy) उम्मीद की एकमात्र किरण दिख रही है। इंडस्ट्री का मानना है कि सरकार इस मौके का फायदा उठाने के लिए अगले बजट का इस्तेमाल कर सकती है। टेलीकॉम सेक्टर ने फाइनेंस मिनिस्टर को बजट को लेकर अपनी उम्मीदों के बारे में बता दिया है। सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) ने सरकार से लाइसेंस फीस में कमी करने की मांग की है। उसने टेलीकॉम नेटवर्क से जुड़े इक्विपमेंट के इंपोर्ट पर कस्टम ड्यूटी खत्म करने की भी मांग की है। एसोसिएशन का मानना है कि टेलीकॉम कंपनियां पूरे देश में 5G टेलीकॉम सेवाएं लॉन्च करने जा रही है। ऐसे में जरूरी उपकरणों के आयात पर ड्यूटी खत्म करने से उन्हें काफी मदद मिलेगी।

जीएसटी की दरों में भी कमी चाहता है टेलीकॉम सेक्टर

COAI ने यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (USOF) भी खत्म करने की जरूरत बताई है। सीओएआई टेलीकॉम कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली सबसे बड़ी संस्था है। Reliance Jio, Bharti Airtel और Vodafone Idea इसकी सदस्य हैं। एसोसिएशन ने कहा है कि सरकार को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) को भी तर्कसंगत बनाने की जरूरत है। सरकार को लाइसेंस फीस को मौजूदा 3 फीसदी से घटाकर 1 फीसदी करनी चाहिए। टेलीकॉम इंडस्ट्री का प्रतिनिधित्व करने वाले एसोसिएशन ने सोमवार (21 नवंबर) को फाइनेंस मिनिस्ट्री को बजट-पूर्व चर्चा में अपनी उम्मीदों के बारे में बताया।


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MSME ने भी बजट से अपनी उम्मीदों के बारे में वित्त मंत्री को बताया

MSME सेक्टर ने भी अगले साल आने वाले बजट को लेकर अपनी उम्मीदों के बारे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बताया है। फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो एंड स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (FISME) ने कहा कि बैंक लोन रेटिंग (BLR) को अनिवार्य बनाने का असर MSME की ग्रोथ पर पड़ रहा है। इस सेक्टर के प्रतिनिधियों का कहना था कि सरकार को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की जरूरत है। इसके लिए RBI, बैंकों और मसले से जुड़े दूसरे पक्षों की एक संयुक्त समिति बनाई जानी चाहिए। इस समिति को MSME के लिए एक विशेष रेटिंग मॉडल बनानी चाहिए।

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