बजट 2023: प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल फर्मों ने लिस्टेड (Listed shares) और अनलिस्टेड शेयरों (Unlisted Shares) के लिए लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेंस (Long term Captial Gains) के एक जैसे नियमों की मांग की है। उनका मानना है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में इस बारे में ऐलान कर सकती हैं। दरअसल, यह मांग काफी समय से की जा रही है। अगर इस बार बजट में उनकी यह मांग मान ली जाती है तो इससे प्राइवेट सेक्टर में इनवेस्टमेंट काफी बढ़ेगा। अभी अनलिस्टेड शेयरों और लिस्टेड शेयरों पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स के नियम एक समान नहीं हैं।
अभी क्या हैं एलटीसीजी टैक्स के नियम?
24 महीने से ज्यादा समय तक रखे गए अनलिस्टेड शेयरों पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स 12 महीने तक रखे गए लिस्टेड शेयरों पर लगने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स का दोगुना है। अनलिस्टेड शेयरों पर लगने वाला लॉन्ग कैपिटल गेंस टैक्स 20 फीसदी है, जबकि लिस्टेड शेयरों के लिए 10 फीसदी है। सरकार ने 2022 के बजट में अनलिस्टेड शेयरों के एलटीसीजी पर सरचार्ज की सीमा 15 फीसदी तय की थी। इससे इफेक्टिव टैक्स रेट करीब 16 फीसदी हो गया था। इससे पहले अनिलिस्टेड शेयरों पर सरचार्ज 37 फीसदी से ज्यादा था।
नियम एक जैसे होने से क्या होगा फायदा?
शेयरों में इनवेस्टमेंट से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरचार्ज की सीमा तय करने के बाद अगर सरकार लिस्टेड और अनलिस्टेड शेयरों के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स को एक समान कर देती है तो इससे देश में प्राइवेट मार्केट इनवेस्टमेंट बढ़ेगा। इससे खासकर स्टार्टअप्स को फायदा होगा, जिन्हें अभी फंड जुटाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। लिस्टेड शेयरों पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर लगने वाला टैक्स अप्रैल 2018 से प्रभावी है। इससे पहले इस पर किसी तरह का टैक्स नहीं लगता था। किसी लिस्टेड शेयर को एक साल से ज्यादा समय तक रखने को लॉन्ग टर्म कहा जाता है। ऐसे शेयरों को बेचने पर जो प्रॉफिट होता है उसे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस कहा जाता है।
क्यों जरूरी है नियमों को एक समान बनाना?
3one4 Capital के पार्टनर सिद्धार्थ पई ने कहा कि प्राइवेट कंपनियों में निवेश होने वाले पैसे के बडे हिस्से का इस्तेमाल रोजगार के मौके पैदा करने, नई कंपनी बनाने और इकोनॉमी की ग्रोथ के लिए होता है। अगर आप स्टॉक मार्केट को देखें तो इसमें एक इनवेस्टर्स से दूसरे को कैपिटल का ट्रांसफर होता है। स्टॉक के प्राइस का असर कंपनी के फंडामेंटल्स पर शायद ही कभी पड़ता है। दूसरा, अनलिस्टेड मार्केट में भी रिस्क है, क्योंकि इसमें लिक्विडिटी नहीं होती है। इसीलिए अनलिस्टेड कंपनियों के शेयरों में ऐसे इनवेस्टर्स इनवेस्ट करते हैं, जिनके पास काफी धैर्य होता है।
दूसरे देशों में लिस्टेड और अनलिस्टेड शेयरों के लिए एक जैसे नियम
पई ने कहा कि अनलिस्टेड शेयरों का होल्डिंग पीरियड लिस्टेड शेयरों के मुकाबले ज्यादा होता है। इंडिया दुनिया में एकमात्र ऐसा देश है, जहां लिस्टेड और अनलिस्टेड शेयरों पर कैपटल गेंस टैक्स के नियम अलग-अलग हैं। अनलिस्टेड शेयरों पर एलटीसीजी टैक्स लिस्टेड शेयरों के मुकाबाले दोगुना है। इंडस्ट्री चाहती है कि इस फर्क को इस बार के बजट में खत्म कर दिया जाए।