Budget 2023: MSME की मुश्किलें दूर होंगी, पर्याप्त पूंजी उपलब्ध कराने और टैक्स नियमों को आसान बनाने के उपाय करेंगी निर्मला सीतारमण

Budget 2023: करीब 3 साल बाद MSME सेक्टर में हालात सामान्य हो रहे हैं। कोरोना की महामारी की सबसे ज्यादा मार इस सेक्टर पर पड़ी थी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण को यूनियन बजट 2023 में एमएसएमई सेक्टर के लिए बड़े ऐलान करने चाहिए

अपडेटेड Jan 30, 2023 पर 12:53 PM
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Union Budget 2023: इंडिया की GDP में MSME सेक्टर का योगदान करीब 30 फीसदी है। रोजगार देने में इस सेक्टर का योगदान करीब 45 फीसदी है। इंडिया के कुल एक्सपोर्ट में इसका योगदान करीब 40 फीसदी है।

Union Budget 2023: इंडियन इकोनॉमी की रीढ़ माने जाने वाले MSME को यूनियन बजट 2023 से बहुत उम्मीदें हैं। 2020 में कोरोना की महामारी की सबसे ज्यादा मार जिन सेक्टर पर पड़ी थी, उसमें MSME शामिल था। अब इस सेक्टर की गाड़ी धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है। लेकिन, फिर से रफ्तार पकड़ने के लिए इसे सरकार की मदद की जरूरत है। मनीकंट्रोल ने इस सेक्टर के प्रतिनिधियों से बातचीत की। इसका मकसद यह जानना था कि MSME सेक्टर को फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण के यूनियन बजट से क्या-क्या उम्मीदें हैं। उनका यह मानना था कि यूनियन बजट 2023 में सरकार का फोकस MSME पर होगा। इसकी वजह यह है कि इंडिया की GDP में इस सेक्टर का योगदान करीब 30 फीसदी है। रोजगार देने में इस सेक्टर का योगदान करीब 45 फीसदी है। इंडिया के कुल एक्सपोर्ट में इसका योगदान करीब 40 फीसदी है। आइए जानते हैं प्रतिनिधियों ने यूनियन बजट 2023 (Budget 2023) को लेकर क्या कहा।

दिनेश अग्रवाल, फाउंडर एवं चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर, IndiaMART

यूनियन बजट 2023 से मेरी उम्मीदें पहले की तरह हैं। सरकार को सबसे पहले टैक्स के नियमों और कंप्लायंस को आसान बनाने की जरूरत है। छोटे उद्यमों में काम करने वाले लोगों की संख्या सीमित होती है। इसलिए कंप्लायंस पर उन्हें काफी ज्यादा खर्च करना पड़ता है। इसमें समय भी काफी लगता है। अगर टैक्स के नियमों और कंप्लायंस को आसान बनाया जाता है तो इससे MSME को काफी मदद मिलेगी। इससे वे अपना फोकस कारोबर और इनोवेशन पर बढ़ा सकेंगे।

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उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने से मदद मिली है, लेकिन इसे और आसान बनाने की जरूरत है। सरकार को एमएसएमई को सस्ती दरों पर लोन उपलब्ध कराने के उपाय भी करने चाहिए। इसकी वजह यह है कि एमएसएमई की क्रेडिट साइकिल लंबी होती है। उनका प्रॉफिट मार्जिन भी काफी कम होता है।

संदीप छेत्री, सीईओ-Tradeindia.com

इंडियन इकोनॉमी को दुनिया की सबसे लचीली इकोनॉमी में से एक माना जाता है। इसकी वजह यह है कि सरकार समय-समय पर अनुकूल पॉलिसी लागू करती रही है। इंडिया में MSME सेक्टर का आकार बहुत बड़ा है। इस पर दुनिया के दूसरे देशों से अलग ग्लोबल ट्रेड का भी ज्यादा असर नहीं पड़ता। इसलिए इसमें ग्लोबल इकोनॉमी की प्रॉब्लम से इंडियन इकोनॉमी को सुरक्षा देने की क्षमता है। मेरा मानना है कि सरकार को यूनियन बजट 2023 में लोन की आसान उपलब्धता के साथ ही नई टेक्नोलॉजी अपनाने के लिए MSME को प्रोत्साहन देने की जरूरत है।

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सक्षम मलिक, प्रोग्राम मैनेजर-The Dialogue

सरकार को स्किल डेवलपमेंट और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर फोकस बढ़ाने की जरूरत है। इससे नई टेक्नोलॉजी के मामले में स्टार्टअप्स ज्यादा दिलचस्पी दिखाएंगे। सरकार को बच्चों को न सिर्फ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रति जागरूक बनाने की जरूरत है बल्कि शुरुआत से ही उन्हें बिजनेस इनवायरमेंट के हिसाब से ढालने की कोशिश करने की जरूरत है। सरकार को एमएसएमई सेक्टर के लिए बजट आवंटन बढ़ाना चाहिए।

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