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Budget 2023: क्या बढ़ेगी लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स में मिलने वाली छूट की सीमा?

Budget 2023: Tax2win.in के सीईओ और को-फाउंडर अभिषेक सोनी का कहना है कि इस बजट में लॉन्ग टर्म कैपिटल के होल्डिंग पीरियड की शर्त को तर्कसंगत बनाया जाना चाहिए। वर्तमान में सभी कैपिटल असेट की होल्डिंग पीरियड और इन पर लागू होने वाला टैक्स अलग-अलग है। इसको सरल किए जाने की जरूरत है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 26, 2023 पर 4:02 PM
Budget 2023: क्या बढ़ेगी लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स में मिलने वाली छूट की सीमा?
इक्विटी के शॉर्ट टर्म गेन पर 15 फीसदी की दर से टैक्स लगता है। यह दर उस समय तक सही थी जबतक आयकर की न्यूनतम दर 10 फीसदी थी। अब जबकि आयकर की निम्नतम दर 5 फीसदी पर आ गई । ऐसे में शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर लगने वाला 15 फीसदी टैक्स किसी दंड जैसा लगता है

Budget 2023: हर यूनियन बजट के पहले अक्सर निवेशकों में तमाम अपेक्षाएं रहती हैं। इस बार भी स्थितियां अलग नहीं हैं। इस बार भी बजट से निवेशकों को तमाम आशाएं हैं। निवेशकों और मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेश के होल्डिंग पीरियड की शर्तों को तर्कसंगत बनाने की जरूरत है। अधिकांश निवेशकों को अपना टैक्स चुकाने के लिए असेट क्लास को लॉन्ग टर्म या शॉर्ट टर्म में वर्गीकृत करने के लिए निर्धारित मानकों में समझने में दिक्कत होती है।

गौरतलब है कि अलग-अलग असेट क्लास के लिए लॉन्ग टर्म की कटेगरी में जाने के लिए अलग-अलग समयावधि निर्धारित है। इक्विटी और इक्विटी म्यूचुअल फंड में 1 साल से ज्यादा के निवेश को लॉन्ग टर्म का निवेश माना जाता है। वहीं गैर इक्विटी MF में 3 साल से ज्यादा के निवेश को लॉन्ग टर्म माना जाता है। जबकि रियल एस्टेट के लिए यह अवधि 2 साल और लिस्टेड बॉन्ड्स के लिए यह अवधि 1 साल है।

लॉन्ग टर्म कैपिटल के होल्डिंग पीरियड की शर्त को तर्कसंगत बनाने की जरूरत

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