Budget 2024 : यूनियन बजट न सिर्फ सरकार की आय और खर्च का ब्योरो होता है बल्कि इसमें कई टारगेट भी होते हैं। इकोनॉमी के लिहाज से फिस्कल डेफिसिट का टारगेट बहुत अहम माना जाता है। सरकार हर यूनियन बजट में अगले वित्त वर्ष के लिए फिस्कल डेफिसिट का टारगेट तय करती है। फिर, सरकार का फोकस इस बात पर होता है कि फिस्कल डेफिसिट टारगेट को पार नहीं करे। फिस्कल डेफिसिट जितना कम होता है, इकोनॉमी के लिए उतना अच्छा रहता है। जिन देशों की इकोनॉमी की सेहत खराब होती है, उनमें फिस्कल डेफिसिट बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। इंडिया में फिस्कल डेफिसिट को कंट्रोल में रखने के लिए सरकार ने एक कानून बनाया था। सरकार उस कानून को ध्यान में रख फिस्कल डेफिसिट का टारगेट तय करती है। बजट 2023 में वित्तमंत्री Nirmala Sitharaman ने फिस्कल डेफिसिट के लिए 5.9 फीसदी टारगेट तय किया था।
फिस्कल डेफिसिट तय लक्ष्य तक रहने की उम्मीद
इस हफ्ते की शुरुआत में वित्त राज्य मंत्री भागवत कराड ने बताया था कि इस वित्त वर्ष में केंद्र सरकार का फिस्कल डेफिसिट यूनियन बजट में तय 5.9 फीसदी के लक्ष्य तक रहने की उम्मीद है। इसका मतलब यह है कि सरकार के रेवेन्यू और खर्च के बीच का अंतर जीडीपी के 5.9 फीसदी तक रहेगा। यह सरकार के लिए और देश की इकोनॉमी के लिए अच्छी खबर है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य के अंदर रहना इकोनॉमी के लिए बहुत अच्छा है। यह जितना कम हो, इकोनॉमी के लिए उतना ही अच्छा है। कम फिस्कल डेफिसिट इकोनॉमी की सेहत के बारे में भी बताता है।
पहले 7 महीनों में फिस्कल डेफिसिट लक्ष्य का 45 फीसदी
सरकार की तरफ से नवंबर में जारी डेटा के मुताबिक, इस फाइनेंशियल ईयर (2023-24) के पहले सात महीनों में फिस्कल डेफिसिट 8.04 लाख करोड़ रुपये था। यह पूरे वित्त वर्ष का 45 फीसदी है। सरकार ने इस वित्त वर्ष के लिए जीडीपी का 5.9 फीसदी का टारगेट तय किया है। इसके मुताबिक, इस वित्त वर्ष में फिस्कल डेफिसिट 17.86 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं होना चाहिए। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 12 दिसंबर को लोकसभा में कहा था कि इकोनॉमी सही दिशा में जा रही है। यह इस बात से पता चलता है कि इंडिया दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली इकोनॉमी है।
फिस्कल डेफिसिट का टारगेट तय करने के फायदे
सरकार बजट में फिस्कल डेफिसिट का टारगेट इसलिए तय करती है, ताकि उसके रेवेन्यू और खर्च के बीच सामंजस्य रहे। इसलिए सरकार कोई नया खर्च करने से पहले यह देखती है कि इससे उसका कुल खर्च कितना बढ़ जाएगा। सरकार अपने खर्च को एक सीमा से ज्यादा नहीं जाने देती है। इसके लिए फिस्कल डिफिसिट का टारगेट उसे ज्यादा खर्च करने से रोकता है। ज्यादा फिस्कल डेफिसिट का मतलब है कि सरकार को अपने खर्च को पूरा करने के लिए ज्यादा कर्ज लेना पड़ेगा। ज्यादा कर्ज लेने से सोशल वेल्फेयर, इंफ्रास्ट्रक्चर, कैपिटल एक्सपेंडिचर पर खर्च करने के लिए उसके हाथ में कम पैसे बचेंगे। सरकार का ज्यादा पैसा कर्ज का इंटरेस्ट चुकाने में निकल जाएगा।