इंडिया जैसे विकासशील देश में आम तौर पर फिस्कल डेफिसिट ज्यादा होता है। इसकी वजह यह है कि सरकार का खर्च रेवेन्यू से ज्यादा होता है। इस गैप का पूरा करने के लिए सरकार मार्केट से कर्ज लेती है। इस कर्ज पर वह इंटरेस्ट चुकाती है। यह इंटरेस्ट पेमेंट भी एक तरह का खर्च है और इसे अनप्रोडक्टिव एक्सपेंडिचर माना जाता है। इसीलिए सरकार इंटरेस्ट पर होने वाले इस खर्च को कंट्रोल में रखने की कोशिश करती है। ऐसा तभी होगा जब सरकार मार्केट से कम कर्ज लेगी। सरकार के कर्ज लेने का असर इंटरेस्ट पेमेंट पर तो पड़ता ही है साथ ही इंटरेस्ट रेट साइकिल और बॉन्ड्स पर भी इसका असर पड़ता है।
