स्टॉक मार्केट में तेजी के बावजूद एफएमसीजी के निवेशक मायूस हैं। इसकी वजह एफएमसीजी कंपनियों की मुश्किल है। फूड इनफ्लेशन में उछाल, कमजोर मानसून, इनकम में स्थिरता का असर ग्रामीण इलाकों में डिमांड पर पड़ा है। इससे एफएमसीजी कंपनियों का मुनाफा ज्यादा नहीं बढ़ा है। लेकिन, आगे हालात बदल सकते हैं। एनालिस्ट्स का कहना है कि एफएमसीजी सेक्टर की रौनक जल्द लौट सकती है। हाल में लोकसभा चुनावों में बीजेपी को अपने दम पर सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलने से सरकार का फोकस ग्रामीण इलाकों पर बढ़ा है। इस महीने पेश होने वाले यूनियन बजट में ग्रामीण इलाकों के लिए सरकार बड़े ऐलान कर सकती है।
वेल्फेयर स्कीम के लिए ऐलोकेशन बढ़ने की उम्मीद
एनालिस्ट्स का मानना है कि सरकार बजट में सोशल सेक्टर खासकर वेल्फेयर स्कीम के लिए ऐलोकेशन बढ़ा सकती है। इससे ग्रामीण इलाकों में कंजम्प्शन बढ़ेगा। इससे एफएमसीजी कंपनियों को फायदा होगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार का फोकस ग्रामीण इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी बेहतर करने पर होगा। इसके लिए सरकार को पूंजीगत खर्च करना होगा। इससे ग्रामीण इलाकों में लोगों के हाथ में पैसे जाएंगे।
कृषि कमोडिटी के निर्यात पर रोक हटने से होगा फायदा
UBS चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट तनवी गुप्ता जैन ने कहा, "हमें FY25 में रूरल डिमांड में साइक्लिकल रिकवरी की उम्मीद है। इसमें यूनियन बजट में सोशल सेक्टर के लिए ज्यादा ऐलोकेशन का हाथ होगा। सरकार पूंजीगत खर्च पर अपना फोकस बनाए रखेगी। पूंजीगत खर्च की ग्रोथ 10 फीसदी से ज्यादा रह सकती है। कृषि कमोडिटी के निर्यात पर रोक हटने का भी फायदा होगा।" पिछले एक साल में कई राज्यों ने वेल्फेयर प्रोग्राम पर अपने खर्च बढ़ाए हैं। इसमें किसानों को ज्यादा कैश ट्रांसफर शामिल है। किसानों के लिए एमएसपी के ऊपर बोनस का भी ऐलान किया गया है।
इन कंपनियों के शेयरों में आ सकती है तेजी
सरकार देश में खाद्य तेलों, दलहन, फल और सब्जियों का उत्पादन बढ़ाने के लिए इनसेंटिव बढ़ा रही है। इससे फूड इनफ्लेशन में कमी आने की उम्मीद है। इससे कई चीजों के उत्पादन के लिए कच्चे माल की कीमतों में भी कमी आएगी। इसका सीधा फायदा Dabur India, Hindustan Uniliver, Nestle India और Godrej Consumer Products जैसेी कंपनियों को मिलेगा।