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Budget 2024: प्राचीन भारत में भी था बजट का चलन, लिया जाता था टैक्स, जानिए कौन होते थे वित्त मंत्री

Budget 2024: भारत में प्राचीन काल से ही बजट का चलन था। उस समय भी टैक्स वसूला जाता रहा है। उस टैक्स का इस्तेमाल सैन्य क्षमता को बढ़ाने में किया जाता था। प्राचीन भारत में स्वर्ण, रजत, ताम्र और मिश्रित मुद्राओं का चलन था। इसे पण कहा जाता था। इन पणों को संभालने के लिए राजकोष बनाया जाता था। आइये जानते हैं प्राचीन भारत का कैसा था वित्त विभाग

Edited By: Jitendra Singhअपडेटेड Dec 13, 2023 पर 2:09 PM
Budget 2024: प्राचीन भारत में भी था बजट का चलन, लिया जाता था टैक्स, जानिए कौन होते थे वित्त मंत्री
Budget 2024: वैदिक काल में सभा, समिति और प्रशासन व्यस्था के तीन अंग थे।

Budget 2024: देश का आम बजट यानी देश का वित्तीय लेखा-जोखा। भारत में हर साल बजट एक फरवरी को पेश होता है। बजट शब्द एक पुराने फ्रेंच शब्द से लिया गया है। जिसका मतलब है छोटा सा बैग। शायद उस वक्त एक छोटे से बैग में पूरी दौलत समा जाती रही होगी या फिर उस वक्त के मंत्री एक छोटे से बैग में अपनी अहम घोषणाओं को लपेटकर लाया करते होंगे। बजट का चलन भारत में प्राचीन काल से हैं। भारत में पुराने समय से ही टैक्स व्यस्था रही है। उस टैक्स का इस्तेमाल सैन्य क्षमता को बढ़ाने में किया जाता था। इतना ही नहीं इसे जनता के हित में खर्च किया जाता रहा है।

सबसे पहले प्राचीन भारतीय मुद्रा फूटी कौड़ी से कौड़ी, कौड़ी से दमड़ी, दमड़ी से धेला, धेला से पाई, पाई से पैसा, पैसा से आना, आना से रुपया बना। अगर किसी के पास 256 दमड़ी होती थी तो वह 192 पाई के बराबर होती थी। इसी तरह 128 धेला, 64 पैसे, और 16 आना 1 रुपये के बराबर होता था। वहीं तीन फूटी कौड़ी को एक कौड़ी और 10 कौड़ी एक दमड़ी कहा जाता रहा। दो दमड़ी से एक धेला बनता था। डेढ़ पाई से एक धेला, तीन पाई को एक पैसा कहा जाता रहा। तब चार पैसा एक आना होता था।

रामायण और महाभारत काल का बजट

कुबेर को देवताओं का कोषाध्यक्ष बनाया गया। सैन्य और राज्य के खर्च वो ही ऑपरेट करते थे। वैदिक काल में सभा, समिति और प्रशासन व्यवस्था के तीन अंग थे। सभा का मतलब धर्म संघ की धर्मसभा। समिति का मतलब जन साधारण लोगों की संस्था है। प्रशासन यानी न्याय, सैन्य, वित्त आदि ये सभी प्रशासनिक पदाधिकारियों का काम है। प्रशासन में एक शख्स होता था, जो टैक्स के एवज में मिली वस्तु या सिक्के का हिसाब किताब रखता था। इसमें प्रधान कोषाध्यक्ष के तहत कई वित्त विभाग या खजांची होते थे। ऐसी व्यवस्था रामायण या महाभारत काल तक चली। उस दौर में जो इस व्यस्था की देखभाल करते थए। उसे ‘पणि’ कहा जाता था।

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