Union Budget 2024 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार चुनावों से पहले अपने अंतिम बजट का इस्तेमाल वोटर्स को लुभाने के लिए कर सकती है। सरकार नए खर्च का ऐलान कर सकती है। हालांकि, इस दौरान सरकार का ध्यान फिस्कल डेफिसिट पर रहेगा। सरकार चाहेगी कि इसमें वृद्धि न हो। आर्थिक वृद्धि दर अच्छी रहने से टैक्स कलेक्शन बढ़ा है। इससे सरकार को फिस्कल डेफिसिट को कंट्रोल में रखने में मदद मिली है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी को यूनियन बजट (Union Budget) पेश करेंगी। यह अंतरिम बजट (Interim Budget) होगा। वित्तमंत्री के पास इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाने और चुनावों से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर फोकस करने की गुंजाइश होगी। इनमें महिला, किसान, गरीब और युवा शामिल हैं।
बजट 2024 में बड़े ऐलान की उम्मीद नहीं
इकोनॉमिस्ट्स का कहना है कि इसके बावजूद वित्तमंत्री के खर्च में बहुत ज्यादा इजाफा करने की उम्मीद नहीं है। इसकी बड़ी वजह यह है कि यह अंतरिम बजट होगा। अप्रैल-मई में लोकसभा चुनावों के बाद जो नई सरकार बनेगी वह पूर्ण बजट पेश करेगी। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण पहले संकेत दे चुकी हैं कि अंतरिम बजट में बड़े ऐलान नहीं होंगे। एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की इकोनॉमिस्ट माधवी अरोड़ा ने कहा, "बजट में फिस्कल कंसॉलिडेशन को लेकर सरकार का क्या रुख रहता है, इस पर नजरें होंगी। साथ ही सरकार की प्रायरिटी में क्या होगा, यह भी देखना अहम होगा।"
सरकार फिस्कल पॉलिसी जारी रखने का संकेत दे सकती है
ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के अभिषेक गुप्तान ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आने वाले लोकसभा चुनावों में एनडीए की जीत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरी बार सरकार बनाने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि सरकार फिस्कल प्लान में पॉलिसी जारी रखने का संकेत दे सकती है। 1 फरवरी को वित्तमंत्री दिन में 11 बजे बजट पेश करेंगी। यह उनका छठा बजट होगा। इसमें सबसे ज्यादा निगाहें निम्नलिखित आंकड़ों पर होंगी।
सरकार अपने फिस्कल डेफिसिट में कमी लाने की कोशिश कर रही है। कोरोना की महामारी के दौरान यह जीडीपी के 9.2 फीसदी तक पहुंच गया था। सरकार इसमें धीरे-धीरे कमी लाने की पूरी कोशिश कर रही है। इस वित्त वर्ष के लिए सरकार ने फिस्कल डेफिसिट का 5.9 फीसदी का लक्ष्य तय किया था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार का फिस्कल डेफिसिट टारगेट के अंदर रहने की उम्मीद है। इकोनॉमिस्ट्स के बीच हुए सर्वे के मुताबिक, सरकार अगले वित्त वर्ष में फिस्कल डेफिसिट के टारगेट को घटाकर 5.3 फीसदी कर सकती है।
पिछले तीन सालों में सरकार ने हर साल अपने कैपिटल एक्सपेंडिचर को करीब 33 फीसदी तक बढ़ाया है। सरकार का फोकस रोड, पोर्ट्स और पावर प्लांट्स पर रहा है। इससे इकोनॉमिक ग्रोथ बढ़ाने में मदद मिली है। इस वित्त वर्ष के दौरान इकोनॉमिक ग्रोथ 7 फीसदी से ज्यादा रहने की उम्मीद जताई गई है। इस ग्रोथ के साथ इंडिया दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली इकोनॉमी होगी।
इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि फूड की बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए सरकार ने पिछले साल कई कदम उठाए थे। अब सरकार किसानों की वित्तीय मदद करने पर फोकस बढ़ा सकती है। पिछले साल सरकार ने चावल, चीनी और गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी थी। इससे किसानों की इनकम में कमी आई है। मानसून की कमजोर बारिश का असर भी फसलों पर पड़ा है। इसका सीधा असर ग्रामीण इलाकों में डिमांड पर पड़ा है। देश की 1.4 अरब की आबादी का करीब 65 फीसदी हिस्सा गांवों में रहता है।