Budget 2024: अगले वित्त वर्ष 2024-25 के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी। इसके लिए एक्सपर्ट्स सुझाव भी पेश कर रहे हैं और वित्त मंत्री से आग्रह भी कर रहे हैं। इसी कड़ी में पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) के चेयरमैन दीपक मोहंती ने आग्रह किया है कि एंप्लॉयर्स नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में एंप्लॉयीज की बेसिक सैलरी का 12 फीसदी तक का जो योगदान करते हैं, उसे टैक्स फ्री किया जाना चाहिए। दीपक मोहंती के मुताबिक एंप्लॉयीज के प्रोविडेंट फंड (PF) में 12 फीसदी तक के कांट्रिब्यूशन पर टैक्स बेनेफिट्स मिलता है और अब वह इसी के बराबर एनपीएस में कांट्रिब्यूशन पर एंप्लॉयर्स को टैक्स बेनेफिट्स देने की मांग कर रहे हैं।
आसान भाषा में समझें तो अभी एनपीएस के तहत बेसिक और डीए मिलाकर सैलरी का 10 फीसदी ही एग्जेम्प्ट यानी टैक्स के दायरे से बाहर है जिसे पेंशन नियामक PFRDA के चेयरमैन ने पीएफ खाते के एग्जेम्प्ट लिमिट यानी 12 फीसदी तक करने की मांग की है। हालांकि लक्ष्य तो इसे 14 फीसदी तक ले जाने का है क्योंकि गवर्नमेंट एंप्लॉयीज के मामले में 14 फीसदी तक प्रोविडेंट फंड में कॉन्ट्रिब्यूशन टैक्स फ्री है।
किस सेक्शन के तहत कितनी मिलती है टैक्स में राहत
नेशनल पेंशन स्कीम के तहत एंप्लॉयीज के NPS खाते में बेसिक सैलरी और डीए के 10 फीसदी तक के कॉन्ट्रिब्यूशन पर एंप्लॉयर्स या कॉरपोरेट्स टैक्स एग्जेम्प्शन का दावा कर सकते हैं। सरकारी एंप्लॉयीज के मामले में यह 14 फीसदी है। इनकम टैक्स, 1961 के सेक्शन 36(1)(iv)(a) के तहत प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट में इसे बिजनेस एक्सपेंसेज के तौर पर घटा दिया जाता है।
एंप्लॉयीज भी अपने इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सीसीडी(2) के तहत अपने वेतन के 10 फीसदी तक के कॉन्ट्रिब्यूशन पर टैक्स कटौती का दावा कर सकते हैं। यह फायदा पुराने के साथ-साथ नए टैक्स रिजीम में भी मिलता है। कुल मिलाकर सभी रिटायरमेंट स्कीमों में मिलाकर एंप्लॉयर्स के कॉन्ट्रिब्यूशंस पर सालाना आधिकतम 7.5 लाख रुपये तक टैक्स बेनेफिट्स हासिल किया जा सकता है। यह धारा 80सीसीडी(1) के तहत स्वयं के एनपीएस कॉन्ट्रिब्यूशन पर वेतन के 10 फीसदी तक (1.5 लाख रुपये की कुल 80सी सीमा के अधीन) और धारा 80सीसीडी(1बी) के तहत 50,000 रुपये तक की अतिरिक्त कटौती के अतिरिक्त है।
तेजी से बढ़ रहे NPS के सब्सक्राइबर्स
वित्त वर्ष 2023-24 में PFRDA ने कॉरपोरेट और इंडिविजुअल्स को मिलाकर 13 लाख सब्सक्राइबर्स को एनरोल करने का लक्ष्य रखा है। इस वर्ष अब तक एनपीएस इकोसिस्टम में 5 लाख से अधिक सब्सक्राइबर्स जुड़ चुके हैं। हालांकि नियामक को अभी भी इस वित्त वर्ष के आखिरी तीन महीनों यानी जनवरी-मार्च पर उम्मीदें टिकी हुई हैं। इन तीन महीनों में ऐसे ढेर सारे लोग जुड़ते हैं तो टैक्स बचाने के लिए निवेश करते हैं। मोहंती के मुताबिक सभी सब्सक्राइबर्स की कैटेगरीज मिलाकर एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 11 लाख करोड़ रुपये के लेवल को छू चुका है। वहीं ओवरऑल पूरा एनपीएस सब्सक्राइबर बेस दिसंबर 2022 में 6.06 करोड़ से 16 फीसदी उछलकर दिसंबर 2023 में 7.03 करोड़ पर पहुंच गया। इसमें सरकारी एंप्लॉयीज और अटल पेंशन योजना (APY) सब्सक्राइबर के आंकड़े भी शामिल हैं।
शेयरों से ज्यादा कॉरपोरेट बॉन्ड्स और सरकारी सिक्योरिटीज में लगा है पैसा
11 लाख करोड़ रुपये का जो फंड PFRDA मैनेज कर रही है, उसमें शेयरों की हिस्सेदारी महज 17 फीसदी है। मोहंती के मुताबिक इसमें एएए-रेटेड कॉरपोरेट बॉन्ड्स और सरकारी सिक्योरिटीज का दबदबा अधिक है। रीट्स (रियल इनवेस्टमेंट ट्रस्ट्स), इंफ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs) और अल्टरनेटिव फंड्स को भी मंजूरी मिली हुई है लेकिन अभी भी इनकी हिस्सेदारी बहुत ही कम है। 30 दिसंबर 2023 तक के आंकड़ों के मुताबिक सभी सब्सक्राइबर कैटेगरीज में टोटल एयूएम करीब 28 फीसदी उछलकर 10.91 लाख करोड़ रुपये के लेवल को पार कर गया।