हर साल यूनियन बजट से पहले जिन चीजों के बारे में सबसे ज्यादा चर्चा होती है उनमें इनकम टैक्स एक्ट का सेक्शन 80सी शामिल है। इसकी बड़ी वजह यह है कि करोड़ों टैक्सपेयर्स इस सेक्शन का फायदा उठाते हैं। इस साल 1 फरवरी को अंतरिम बजट पेश होने से पहले भी सेक्शन 80सी की काफी चर्चा थी। हालांकि, दिसबंर 2023 में ही वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कर दिया था कि अंतरिम बजट में कोई बड़ा ऐलान नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा था कि बड़े ऐलान के लिए जुलाई में आने वाले फुल बजट का इंतजार करना होगा।
लोगों की सेविंग्स बढ़ाने में मिलेगी मदद
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) अगले महीने पेश होने वाले बजट में सेक्शन 80सी (Section 80C) की लिमिट बढ़ाने की ऐलान कर सकती हैं। इसकी कई वजहें हैं। पिछले कुछ सालों में रिटेल इनफ्लेशन (Inflation) खासकर फूड इनफ्लेशन तेजी से बढ़ा है। इससे लोगों का रोजमर्रा की चीजों पर खर्च बढ़ा है। इसका सीधा असर उनकी सेविंग्स पर पड़ा है। इनकम बढ़ने के बावजूद कई लोगों की सेविंग्स (Savings) नहीं बढ़ी है। अगर सरकार सेक्शन 80सी की लिमिट बढ़ाती है तो लोगों को सेविंग्स बढ़ाने का मौका मिलेगा।
नई रीजीम में टैक्सपेयर्स की कम दिलचस्पी
सरकार ने बजट 2023 में इनकम टैक्स की नई रीजीम को अट्रैक्टिव बनाने के लिए कई ऐलान किए थे। इसके बावजूद नई टैक्स रीजीम में लोगों की दिलचस्पी नहीं बढ़ी है। पिछले साल अगस्त में आए ऑनलाइन टैक्स फाइलिंग प्लेटफॉर्म क्लियर के सर्वे के नतीजे चौंकाने वाले हैं। इस सर्वे ने बताया है कि अब भी 85 फीसदी इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स रिटर्न फाइल करने के लिए इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल करते हैं। इसका मतलब है कि बजट 2020 में ऐलान के 4 साल बाद भी नई रीजीम में लोगों की दिलचस्पी नहीं बढ़ी है। इसलिए सेक्शन 80सी की लिमिट बढ़ाने से करोड़ों टैक्सपेयर्स को फायदा होगा।
अभी सालाना 1.5 लाख रुपये की लिमिट
इनकम टैक्स की सिर्फ ओल्ड रीजीम में सेक्शन 80सी का फायदा मिलता है। अभी 80सी की लिमिट सालाना 1.5 लाख रुपये है। इसका मतलब है कि सेक्शन 80सी के तहत आने वाले इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश कर इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स डिडक्शन का दावा कर सकते हैं। इस सेक्शन के तहत करीब एक दर्जन इनवेस्टमेंट इंसट्रूमेंट्स आते हैं। इनमें म्यूचुअल फंड की टैक्स सेविंग्स (ELSS), PPF, लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी, एनएससी, सुकन्या समृद्धि योजना आदि शामिल हैं। इसके अलावा दो बच्चों की ट्यूशन फीस पर डिडक्शन भी इसी सेक्शन के तहत मिलता है। उपर्युक्त इंस्ट्रूटमेंट्स में एक वित्त वर्ष में मैक्सिमम 1.5 लाख रुपये का निवेश कर डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है।
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2014 से नहीं बढ़ाई गई है लिमिट
सेक्शन 80सी की लिमिट 2014 से नहीं बढ़ाई गई है। इस तरह बीते 10 साल से यह लिमिट 1.5 लाख रुपये बनी हुई है। इस बीच लोगों की इनकम काफी बढ़ी है। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को रुपये की एजस्टेड वैल्यू को देखते हुए सेक्शन 80सी की लिमिट बढ़ाने की जरूरत है। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसे बढ़ाकर कम से कम 3 लाख रुपये करना चाहिए। इससे मिडिल क्लास को काफी राहत मिलेगी। फूड इनफ्लेशन और पेट्रोल की ऊंची कीमतों के चलते उसकी सेविंग्स नहीं बढ़ पा रही है।