Union Budget 2024 : केंद्रीय बजट (Union Budget) पेश होने में एक हफ्ते से कम समय बचा है। इस बजट को लेकर हर वर्ग की अपनी-अपनी उम्मीदें हैं। सवाल है कि क्या बजट में होने वाले ऐलान कंजम्प्शन स्टॉक्स की रौनक बढ़ेगी? 1 फरवरी को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) के बजट पेश होने से पहले स्टॉक मार्केट्स में काफी उतार-चढ़ाव दिखा है। उधर, यह माना जा रहा है कि सरकार कंज्यूमर डिमांड खासकर ग्रामीण इलाकों में खर्च और डिमांड बढ़ाने वाले उपायों पर बजट में फोकस करेगी। कोरोना की महामारी के बाद शहरी इलाकों में तो डिमांड लौट आई है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में अब भी मांग कमजोर बनी हुई है। देश की आबादी करीब 1.4 अरब है। लेकिन डिमांड मुख्य रूप से करीब 10 करोड़ आबादी से आती है। ब्रोकिंग फर्म एंजल वन के सीनियर वीपी (रिसर्च) अमर देव सिंह ने बताया कि टू-व्हीलर्स की बिक्री को कंजम्प्शन का बड़ा संकेत माना जाता है। इसकी बिक्री कोरोना से पहले के स्तर से कम बनी हुई है। इससे पता चलता है कि आबादी के बड़े हिस्से में मांग सामान्य लेवल पर नहीं पहुंची है।
बजट 2024 में मांग बढ़ाने वाले उपाय हो सकते हैं
Rupeezy के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट शीरशम गुप्ता ने कहा कि छोटी अवधि में आईटी और स्टार्टअप फंडिंग में चुनौतियां दिख रही हैं, इसके बावजूद लंबी अवधि में डिस्क्रेशनरी कंजम्प्शन के लिए संभावनाएं बेहतर दिख रही हैं। अंतरिम बजट में सरकार लोगों की खर्च करने वाली आय बढ़ाने की कोशिश करेगी। इसके लिए बजट में लोकलुभावन ऐलान हो सकते हैं। हालांकि, यह अंतरिम बजट होगा। आम तौर पर अंतरिम बजट में सरकार बड़े ऐलान नहीं करती है। लेकिन, 2019 में अंतरिम बजट में सरकार ने कई बड़े ऐलान किए थे।
इंफ्रास्ट्रक्टर पर फोकस से डिमांड को मजबूती मिलेगी
बोनांजा पोर्टफोलियो के रिसर्च एनालिस्ट ओमकार कामेतकर ने कहा कि डिमांड बढ़ाने का एक रास्ता प्रमुख अनाजों की न्यूनतम समर्थन कीमतें बढ़ाना हो सकता है। इसके अलावा टैक्सपेयर्स को कुछ रियायतें या रिबेट्स दिए जा सकते हैं। जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च एनालिस्ट विंसेट केए ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस बनाए रखने से भी कंजम्प्शन को बढ़ावा मिलेगा। यह भी ध्यान रखना होगा कि लोकसभा चुनावों के दौरान सरकार और राजनीतिक पार्टियां काफी पैसे खर्च करती हैं, जिससे कंज्यूमर स्पेंडिंग को बढ़ावा मिलता है।
सरकार को अपनी वित्तीय स्थिति का ध्यान भी रखना होगा
हालांकि, डिमांड बढ़ाने की कीमत सरकार को चुकानी पड़ेगी। सिंह ने कहा कि सरकार पर फिस्कल डेफिसिट को काबू में रखने का दबाव है। हालांकि, फिलहाल इसे लेकर सरकार को चिंता नहीं है। इस वित्त वर्ष के दौरान फिस्कल डेफिसिट के 5.9 फीसदी के तय लक्ष्य से थोड़ा ज्यादा रहने की उम्मीद है। यह 6 फीसदी तक पहुंच सकता है। उधर, MGNREGA के लिए आवंटन बढ़ाने और फूड सिक्योरिटी पर फोकस से ग्रामीण इलाकों में डिमांड बढ़ाने में मदद मिलेगी। स्टडी से पता चला है कि MGNREGA जैसी स्कीमों का अच्छा असर रूरल इकोनॉमी पर पड़ा है।