Economic Survey 2023: देश के लोगों को सस्ते में अच्छी दवाईयां उपलब्ध हो सके, इसके लिए सरकार ने पिछले साल अहम फैसले लिए। आज संसद में चालू वित्त वर्ष 2022-23 की आर्थिक सेहत की रिपोर्ट पेश हुई। इसमें सरकार ने जानकारी दी कि पिछले साल कितनी दवाईयों की अधिकतम कीमत तय हुई और इसके अलावा सस्ते में दवाईयां उपलब्ध कराने के लिए जनऔषधि केंद्र खोलने का फैसला किया गया। केंद्र सरकार ने 2022 तक NLEM, 2015 के तहत 358 दवाओं के 890 फॉर्मूलेशन के लिए अधिकतम कीमत तय किया था। ये दवाईयां अलग-अलग बीमारियों से संबंधित हैं और इनकी अधिकतम कीमत नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन्स (NLEM), 2015 के तहत तय की गई हैं।
दवाइयों की अधिकतम कीमत को नेशनल फार्मास्यूटिकल्स प्राइसिंग अथॉरिटी तय करती है। जिन फॉर्मूलों की दवाईयों की अधिकतम कीमत तय की गई हैं, उनका इस्तेमाल संक्रामक बीमारियों, तनाव, सुगर, कैंसर, टीबी, सांस की बीमारियों और स्किन की बीमारियों इत्यादि से जुड़े रोगों में होता है।
फिर नए नियम के तहत भी तय हुई अधिकतम कीमतें
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिछले साल सिंतबर में NLEM 2022 लागू किया था। फिर इसके तहत नवंबर 2022 में फार्मा डिपार्टमेंट ने 11 नवंबर 2022 को ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर (DPCO) के शेड्यूल 1 को संशोधित किया था। इकोनॉमिक सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक NLEM, 2022 के तहत 31 दिसंबर 2022 तक 119 फॉर्म्यूलेशन की अधिकतम कीमतें तय की गई। इसके अलावा DPCO, 2013 के तहत 2196 फॉर्मूलों के दवाईयों की अधिकतम कीमतें फिक्स की गईं।
सस्ती दवाईयों के लिए शुरू किया गई खास योजना
आर्थिक सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक सभी नागरिकों को सस्ते में और अच्छी गुणवत्ता वाली दवाईयों को उपलब्ध कराने के लिए प्रधानंत्री जनऔषधि परियोजना को शुरू किया गया। इस योजना के तहत जनऔषधि केंद्र के नाम से कई आउटलेट्स भी खोले गए हैं। सस्ती दवाईयां उपलब्ध कराने के साथ-साथ यह स्वरोजगार और नियमित कमाई का भी जरिया बन गया है। 31 दिसंबर 2022 तक देश भर में 9 हजार से अधिक जनऔषधि केंद्र खोले गए और यहां 1759 दवाईयां और 280 सर्जिकल डिवाइसेज की बिक्री होती है।