Economic Survey 2023: केंद्र सरकार का जीडीपी की तुलना में कर्ज का रेश्यो (debt to GDP ratio) बीते 15 साल में मामूली बढ़ा है। वहीं, इसी अवधि में अन्य देशों के लिए इसमें खासी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मंगलवार, 31 जनवरी को संसद में पेश इकोनॉमिक सर्वे 2022-23 में ये बातें कही गई है। सर्वे में कहा गया कि 2005 से 2021 के बीच विभिन्न देशों के जीडीपी की तुलना में सरकार के कर्ज के रेश्यो में खासी बढ़ोतरी देखने को मिली है। हालांकि, भारत के लिए यह बढ़ोतरी मामूली रही और यह रेश्यो 2021 में लगभग 84 फीसदी हो गया जो 2005 में यह 81 फीसदी के स्तर पर था।
इकोनॉमिक ग्रोथ का मिला फायदा
सर्वे के मुताबिक, ऐसा बीते 15 साल के दौरान लचीली इकोनॉमिक ग्रोथ के चलते ग्रोथ-इंटरेस्ट रेट में सकारात्मक अंतर के चलते संभव हुआ। वहीं, इससे सरकार का कर्ज-जीडीपी का स्तर टिकाऊ बना रहा। वित्त वर्ष 21 यानी महामारी से प्रभावित साल के दौरान भारत का कर्ज-जीडीपी रेश्यो बढ़कर 89.6 फीसदी हो गया था और मार्च, 2022 के अंत तक यह घटकर 84.5 फीसदी रहने का अनुमान है।
महामारी के दौरान बढ़ गया था रेश्यो
इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया, “वित्त वर्ष 21 के दौरान केंद्र और राज्यों ने महामारी के चलते खासा कर्ज लिया था, जिसके चलते जीडीपी की तुलना में सरकार की सामान्य देनदारियों का अनुमान खासा बढ़ गया था। हालांकि, वित्त वर्ष 22 (संशोधित अनुमान) में यह रेश्यो अपने पीक से नीचे आ गया। जीडीपी (GDP) के प्रतिशत के रूप में सामान्य सरकारी घाटा वित्त वर्ष 21 के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद कंसोलिडेट हुआ है। सरकार के मीडियम टर्म में फिस्कल कंसोलिडेशन (fiscal consolidation) की राह पर आगे बढ़ते रहने का अनुमान है।”