Budget 2023 Expectation: यूनियन बजट 2023 में सरकार का फोकस ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सोशल वेल्फेयर पर रहने की उम्मीद है। एक साल तक इनफ्लेशन तेजी से बढ़ने के बाद सेंटिमेंट बेहतर हो रहा है। फसल पर खराब मौसम की मार का असर किसानों की इनकम पर पड़ा। शहरी इलाकों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने से ग्रामीण इलाकों के नॉन-फॉर्म सेक्टर को फायदा हुआ है। DBS Bank की एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर एंड सीनियर इकोनॉमिस्ट राधिका राव ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में इनफ्लेशन में नरमी रबी फसल की अच्छी बुवाई से छोटी अवधि में हालात में सुधार की उम्मीद है।
फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को यूनियन बजट पेश करेंगी। अगले साल लोकसभा चुनावों से पहले यह मोदी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट होगा। माना जा रहा है कि बजट पर चुनावों का असर दिखेगा।
सरकार रूरल एंप्लॉयमेंट गारंटी प्रोग्राम MNREGA के लिए आवंटन बढ़ा सकती है। इस फाइनेंशियल ईयर के लिए सरकार ने इस स्कीम के लिए 73,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। सरकार का फोकस क्रॉप इंश्योरेंस, रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर और लो कॉस्ट हाउसिंग पर भी बढ़ने की उम्मीद है। SBI Research की ईकोरैप रिपोर्ट में भी कहा गया है कि सरकार कृषि और ग्रामीण इकोनॉमी पर अपना खर्च बढ़ा सकती है।
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एक्सपर्ट्स का कहना है कि शहरी इलाकों में तो डिमांड बढ़ी है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में अब भी कमजोर बनी हुई है। इसलिए माना जा रहा है कि सरकार यूनियन बजट में ग्रामीण इलाकों पर अपना फोकस बढ़ाएगी। बजट में मांग बढ़ाने वाले उपायों के ऐलान हो सकते हैं। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए केसीसी लोन का रिन्यूएल बढ़ाने की सिफारिश की गई है।
FMCG कंपनियां भी यूनियन बजट 2023 में ग्रामीण इलाकों पर सरकार का फोकस बढ़ने की उम्मीद कर रही है। इससे लोगों की इनकम बढ़ेगी, जिससे डिमांड को भी सपोर्ट मिलेगा। कमजोर डिमांड का असर एफएमसीजी कंपनियों की बिक्री पर पड़ रहा है। एफएमसीजी कंपनियों की कुल बिक्री में ग्रामीण इलाकों की अच्छी हिस्सेदारी है।