Budget 2023: सरकार फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) को कम करने के लिए सब्सिडी पर होने वाले खर्च को घटाना चाहती है। सरकार फर्टिलाइजर सब्सिडी को अगले फाइनेंशियल ईयर में घटाकर 1.40-1.50 लाख करोड़ रुपये करना चाहती है। इस फाइनेंशियल ईयर में फर्टिलाइजर सब्सिडी करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है। पिछले सालों को देखने पर इसकी संभावना कम लगती है। फाइनेंशियल ईयर 2020-21 में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने फर्टिलाइजर सब्सिडी के लिए 70,000 करोड़ रुपये का टारगेट रखा था। लेकिन, फर्टिलाइजर सब्सिडी पर वास्तविक खर्च 1.38 लाख करोड रुपये था। फाइनेंशियल ईयर 2021-22 में सरकार ने फर्टिलाइजर सब्सिडी के लिए 80,000 करोड़ रुपये का आवंटन बजट में किया था। लेकिन, वास्तविक खर्च 1.62 लाख करोड़ रुपये रहा।
कंपनियां लागत से कम कीमत किसानों को बेचती हैं फर्टिलाइजर
पिछले ट्रेंड को देखते हुए अगर निर्मला सीतारमण अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए फर्टिलाइजर सब्सिडी का 1.50 लाख करोड़ रुपये का टारगेट तय करती है तो भी वास्तविक खर्च इससे ज्यादा रह सकता है। फर्टिलाइजर सब्सिडी वह अमाउंट है, जिसका पेमेंट सरकार फर्टिलाइजर बनाने या उसका आयात करने वाली कंपनियों को करती है। दरअसल, ये कंपनियां लागत से कम कीमत पर किसानों को फर्टिलाइजर बेचती हैं। सरकार उन्हें इस नुकसान की भरपाई सब्सिडी चुकाकर करती है। सरकार के निर्देश पर कंपनियां किसानों को कॉस्ट से कम कीमत पर फर्टिलाइजर्स बेचती हैं।
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सरकार के लिए मुमकिन नहीं है कीमतें बढ़ाना
फर्टिलाइजर के रिटेल प्राइस बढ़ाना बहुत संवेदनशील मसला है। यह मसला अगले साल लोकसभा चुनावों को देखते हुए और संवेदनशील हो जाता है। इस साल भी 9 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में सरकार फर्टिलाइजर की रिटेल कीमतों में किसी तरह की वृद्धि नहीं करना चाहेगी। इंडिया अपनी जरूरत का करीब 50 फीसदी फर्टिलाइजर आयात करता है।
जरूरत का 50 फीसदी हिस्सा आयात से पूरा होता है
इंडिया जिन देशों से फर्टिलाइजर्स आयात करता है, उनमें कई ऐसे देश हैं, जिन पर यूक्रेन पर रूस के हमले का असर पड़ा है। 50 फीसदी MOP का आयात रूस और बेलारूस से होता था। 20 फीसदी फॉस्फोरिस एसिड का आयात रूस, बेलारूस और यूक्रेन से होता था। 15 फीसदी अमोनिया का आयात रूस से होता था। 10 फीसदी नेचुरल गैस का आयात रूस से होता था। 60 फीसदी DAP का आयात चीन और सऊदी अरब से होता है। 30 फीसदी से ज्यादा यूरिया का आयात चीन से होता है।
यूक्रेन-रूस लड़ाई से बढ़ी फर्टिलाइजर्स की कीमतें
यूक्रेन और रूस की लड़ाई की वजह से फर्टिलाइजर्स की सप्लाई पर असर पड़ा है। फर्टिलाइजर और उसके रॉ मैटेरियल की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं। इस वजह से इस फाइनेंशियल ईयर (2022-23) में फर्टिलाइजर पर सरकार की सब्सिडी बहुत बढ़ गई। इस लड़ाई के इस साल भी खत्म होने की उम्मीद नहीं दिख रही। इसलिए फर्टिलाइजर्स की ऊंची कीमतों से राहत मिलने की जल्द कोई उम्मीद नहीं दिखती।