Union Budget 2023 : शेयर बाजार और सामान्य कामकाजी लोगों को बजट के दिन का बेसब्री से इंतजार है। भले ही कई लोग बजट से जुड़ी जटिल बातों को नहीं समझते हों, लेकिन इसकी घोषणाएं हम सभी को सकारात्मक या नकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं। बजट पर भी इसका सीधा असर पड़ता है। बजट में वित्तमंत्री की घोषणाओं से स्टॉक्स और सेक्टर्स प्रतिक्रिया देते हैं। बजट के असर को समझने के लिए हम बजट से एक महीने पहले और एक महीने बाद के बाजार के व्यवहार पर एक नजर डालते हैं। इस अवधि से इतर, इसका कोई औचित्य नहीं बनता, क्योंकि अन्य घटनाक्रम बजट के असर को कम कर देते हैं।
मनीकंट्रोल ने बजट के दिन से एक महीने पहले का डेटा जुटाया है, क्योंकि ट्रेडर्स, इनवेस्टर्स और इनसाइडर्स अपनी धारणाओं या खबरों के आधार पर पोजिशन लेना शुरू कर देते हैं।
क्या नीतिगत घोषणाओं का कोई स्पष्ट असर दिखा, जिससे बाजार की चाल बदलने में मदद मिली, या क्या बाजार ने बजट की पूरी तरह अनदेखी कर दी और उस दिन से पहले का ट्रेंड बना रहा?
आइए, मासिक आधार पर डेटा पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 16 में बियर मार्केट, बुल मार्केट में तब्दील हो गया। वहीं, वित्त वर्ष 18 में बुल मार्केट रैली थम गई और बजट के दिन (budget day) चाल उलट गई। दूसरी तरफ, ऐसे भी साल रहे जब बजट के दिन बाजार ने पूरी तरह सतर्कता बरती और कोई बड़ी घोषणा नहीं होने से बाजार को कोई दिशा नहीं मिल सकी।
कुछ साल के लिए, बाजार में पिछला ट्रेंड बरकरार रहा और बजट की पूरी तरह अनदेखी कर दी गई। वहीं वीकली टाइम स्केल पर, तुलना करने पर समान नतीजे मिले जहां हम किसी एक निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सके।
ग्रोथ बजट है या लोकलुभावन
यह तार्किक भी है। अप्रत्यक्ष करों के अलावा अधिकांश अन्य घोषणाओं या नीतिगत परिवर्तनों को अर्थव्यवस्था पर असर दिखने में समय लगता है। बाजार के लिए यह महत्वपूर्ण है कि क्या बजट एक ग्रोथ बजट है जो अर्थव्यवस्था को बढ़ने में मदद करेगा या यह लोकलुभावन बजट है।
वैसे भी बजट का असर कुछ दिनों से ज्यादा नहीं रहता है। फरवरी के पहले दिन बजट की घोषणा की जाती है, लेकिन जल्द ही बाजार अर्निंग सीजन और क्रेडिट पॉलिसी पर प्रतिक्रिया देने लगता है।
आखिर में, यदि ग्लोबल मार्केट एक खास दिशा में ट्रेंड कर रहे हैं तो हमारे बाजार के लिए उल्टी दिशा में जाना मुश्किल है, भले ही वित्तमंत्री कुछ भी कहें।