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Income Tax: क्या सालों से चली आ रही मिडिल क्लास की मुराद इस बार पूरी होगी?

Union budget 2023: मौजूदा कार्यकाल में यह सरकार का आखिरी पूर्ण बजट है. फिलहाल डायरेक्ट टैक्स का 35-40 प्रतिशत हिस्सा इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स से आता है। जाहिर है, फिर पर्सनल इनकम टैक्स के मोर्चे पर बड़ी संख्या में लोगों ने उम्मीद बांध रखी है कि कर-राहत की जो चीज पिछले चार साल से नहीं हुई वह कम से कम इस साल के बजट में तो हो

Chandan Shrivastawaअपडेटेड Jan 08, 2023 पर 8:09 AM
Income Tax: क्या सालों से चली आ रही मिडिल क्लास की मुराद इस बार पूरी होगी?
Union Budget: क्या इस साल भी इनकम टैक्स के पुराने तेवर बने रहेंगे या कुछ नरमी आएगी

Income Tax 2023: `मैं जानती हूं कि तुम्हारा प्यार 100% मेरे लिए है लेकिन मुझतक पहुंचे उसके पहले ही इसमें से 30 प्रतिशत इनकम टैक्स को चला जाता है।` यह रेस्तरां के एकांत कोने में अपने-अपने हिस्से की स्नैक्स खाने और कॉफी पीने बैठे प्रेमी जोड़ों की बात-चीत का हिस्सा है। पिछले साल बजट पेश होने पर जब मिडिल क्लास को इनकम टैक्स (Income Tax) में कोई राहत नहीं मिली तो बातचीत का यह हिस्सा सोशल मीडिया पर एक मध्यवर्गीय दिलजले ने मीम बनाकर डाली थी। ऐसे मीम एक नहीं अनेक बने थे और सोशल मीडिया पर ट्रेन्ड करने लगे तो समाचारों की एक वेबसाइट ने उनपर पूरी कहानी ही बना डाली।

पिछले साल बड़ी उम्मीदें लगायी थीं बजट से वेतनभोगी वर्ग के लोगों ने कि कोई ना कोई बड़ा ऐलान होगा ही और ये राहत कोरोना ने जेब में जो सेंधमारी की है, उसपर कुछ तुरपई का काम करेगी। बजट सरकार की तरफ से लोगों के सामने साल भर के जमा-खर्च का हिसाब भर नहीं होता, वह लोगों की उम्मीदों का आईना भी होता है। और, पिछले साल बजट से तुरंत पहले के सर्वेक्षणों की मानें तो आयकर में राहत की उम्मीद लगाये बैठे लोगों की संख्या अच्छी-खासी तादाद में थी।

पिछले साल बजट ने उम्मीदों पर पानी फेरा

अश्योरेंस, टैक्स एंड एडवाइजरी फर्म Grant Thornton Bharat के मुताबिक साल 2022 के बजट के ऐन पहले लोगों में अर्थव्यवस्था की ग्रोथ को लेकर भरोसा जगा हुआ था। सर्वेक्षण में 81% प्रतिभागियों ने उम्मीद लगायी थी कि कोरोना महामारी की तीसरी लहर अर्थव्यवस्था में कोई बड़ा उलटफेर नहीं लाने वाली। और अर्थव्यवस्था आगे बढ़ेगी। ऐसे कुल 57% प्रतिभागियों का कहना था कि पर्सनल इनकम टैक्स के मोर्चे पर बजट में बड़े सुधार होना ही चाहिए। इसके मुकाबले GST और कस्टम्स में सुधार की उम्मीद लगाये बैठे उत्तरदाताओं की संख्या 25% थी।

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