फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने इस साल 1 फरवरी को पेश अंतरिम बजट में टूरिज्म सेक्टर के लिए 2,449.62 करोड़ रुपये का ऐलोकेशन किया था। यह FY24 के खर्च के संशोधित अनुमान के मुकाबले 44.7 फीसदी ज्यादा था। टूरिज्म सेक्टर से जुड़े लोगों का कहना है कि इस सेक्टर ने काफी समय बाद रफ्तार पकड़ी है। ऐसे में उम्मीद है कि वित्तमंत्री का फोकस यूनियन बजट में इस सेक्टर पर बना रहेगा। वित्तमंत्री इस महीने के तीसरे हफ्ते में यूनियन बजट पेश कर सकती हैं।
लंबे समय बाद टूरिज्म सेक्टर में लौटी है रौनक
MakeMyTrip के को-फाउंडर और ग्रुप सीईओ राजेश मैगोव का मानना है कि यह ट्रैवल और टूरिज्म इंडस्ट्री पर फोकस बढ़ाने का सही समय है। सरकार इस सेक्टर की कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए कुछ खास उपाय कर सकती है। उन्होंने कहा कि ट्रैवल और टूरिज्म इंडस्ट्री ने कोविड की महामारी के बाद रफ्तार पकड़ी है। वित्तमंत्री इस मौके का फायदा उठाने के लिए बड़े ऐलान कर सकती हैं। इस सेक्टर में स्ट्रैटेजिक इनवेस्टमेंट से रोजगार के मौके बढ़ेंगे। साथ ही इस सेक्टर की कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
टैरिफ पर एक समान जीएसटी रेट लागू करने की सलाह
मैगोव का कहना है कि होटल रूम के टैरिफ पर जीएसटी के स्लैब के मौजूदा नियमों में बदलाव करने की जरूरत है। इससे प्राइस के मामले में असमानता देखने को मिलती है क्योंकि होटल डिमांड और पीक सीजन के आधार पर टैरिफ में बदलाव कर देते हैं। उदाहरण के लिए 10000 रुपये टैरिफ वाले रूम पर 18 फीसदी जीएसटी लागू होता है। लेकिन ऑफ सीजन में टैरिफ घटकर 7000 रुपये पर आ जाने पर 12 फीसदी जीएसटी लगता है। अगर होटल के टैरिफ पर जीएसटी का एकसमान 12 फीसदी रेट लागू कर दिया जाए तो इससे कंप्लायंस में भी आसानी होगी।
यह भी पढ़ें: Budget 2024: क्या वित्तमंत्री हेल्थ के लिए ऐलोकेशन बढ़ाएंगी, अभी हेल्थ पर जीडीपी का सिर्फ 0.28% खर्च करती है सरकार
ओटीए को अलग राज्यों में जीएसटी रजिस्ट्रेशन से छूट मिले
उन्होंने कहा कि अभी ऑनलाइन ट्रैवल एजेंट्स (OTAs) को हर राज्य में जीएसटी का रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है। इस नियम की वजह से जरूरत नहीं होने पर भी ओटीए को हर राज्य में मौजूदगी के उपाय करने पड़ते हैं। इससे एडमिनिस्ट्रेटिव कॉस्ट बढ़ जाती है। अगर सरकार ओटीए को अपने सेंट्रल हेड ऑफिस के जरिए राज्यों में रजिस्टर कराने की इजाजत देती है तो इससे उन्हें काफी राहत मिलेगी। इस नियम की वजह से इंटरनेशनल ओटीए के मुकाबले घरेलू ओटीए की प्रतिस्पर्धी क्षमता घट जाती है। इंटरनेशनल ओटीए पर अलग-अलग राज्य में मौजूदगी बनाए रखने का नियम लागू नहीं होता है।