Bank Fraud: पेन बनाने वाली कंपनी Rotomac Global पर ₹750 करोड़ के बैंक फ्रॉड का आरोप, CBI ने दर्ज किया केस

पेन बनाने देश की प्रमुख कंपनी Rotomac Global पर बैंकों के एक समूह का करीब 2,919 करोड़ रुपये बकाया है, जिसमें से 23% हिस्सा इंडियन ओवरसीज बैंक का है

अपडेटेड Nov 16, 2022 पर 10:55 PM
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Rotomac Global इस समय CBI और ईडी दोनों की जांच के घेरे में है

केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) ने इंडियन ओवरसीज बैंक (Indian Overseas Bank) से जुड़े 750.54 करोड़ रुपये के कथित फ्रॉड मामले में कानपुर की रोटोमैक ग्लोबल (Rotomac Global) और उसके डायरेक्टरों के खिलाफ बुधवार 16 नवंबर को केस दर्ज किया। न्यूज एजेंसी पीटीआई ने एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। Rotomac Global, पेन बनाने देश की एक प्रमुख कंपनी है। इसके ऊपर बैंक ऑफ इंडिया की अगुआई वाले बैंकों के एक समूह का करीब 2,919 करोड़ रुपये का बकाया है। इस बकाये में इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) का हिस्सा 23 प्रतिशत है।

CBI ने इन धाराओं में दर्ज किया केस

CBI ने कंपनी और उसके डायरेक्टरों साधना कोठारी और राहुल कोठारी के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के विभिन्न प्रावधानों के अलावा आईपीसी की धारा 120-B और धारा 420 के तहत मामला दर्ज किया है। समूह में शामिल बैंकों की शिकायतों के आधार पर कंपनी पहले से ही CBI और ईडी की जांच के घेरे में है।

2016 में घोषित हुआ था NPA


इंडियन ओवरसीज बैंक ने CBI को दी अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि कंपनी को 28 जून, 2012 को 500 करोड़ रुपये की नॉन-फंड लिमिट को मंजूरी दी गई थी। वहीं, 750.54 करोड़ रुपये की बकाया राशि में चूक के बाद खाते को 30 जून, 2016 को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) घोषित किया गया था।

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इंडियन ओवरसीज बैंक ने जारी किए थे 11 लेटर ऑफ क्रेडिट

बैंक ने आरोप लगाया कि कंपनी की विदेशी व्यापार जरूरतों को पूरा करने के लिए उसने 11 लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) जारी किए थे। ये सभी लेटर डीवॉल्व कर दिया गया था, जो 743.63 करोड़ रुपये के बराबर हैं।

बैंक ने बताया कि कंपनी ने अपने व्यापार के लिए दस्तावेजों का पूरा सेट नहीं पेश किया और सभी लेटर ऑफ क्रेडिट को सिर्फ दो पार्टियों के पक्ष में जारी किया गया था- फारईस्ट डिस्ट्रीब्यूटर्स एंड लॉजिस्टिक पी लिमिटेड और RBI वेंचर लिमिटेड।

डॉक्यूमेंट्स पूरे नहीं होने से बैंक को हुआ संदेह

बैंक ने कहा कि डॉक्यूमेंट्स पूरे नहीं होने के चलते, कंपनी की तरफ से व्यापारिक जहाज और यात्राओं की जो जानकारी और बिल दिए गए हैं, उस पर संदेह है।

बैंक ने जो फॉरेंसिक ऑडिट कराया, उससे भी अकाउंट बुक में हेर-फेर और लेटर ऑफ क्रेडिट से बनने वाली देनदारियों का खुलासा नहीं होने के संकेत मिले थे। साथ ही सेल कॉन्ट्रैक्ट्स, लैडिंग बिल और इससे जुड़ी यात्राओं में भी अनियमितताएं पाई गई हैं।

बकाया राशि की नहीं हो सकी है वसूली

बैंक ने कहा कि कंपनी ने कथित से रूपये से बैंक के साथ फ्रॉड किया और पैसों का हेर-फेर किया। इससे बैंक को वित्तीय नुकसान हुआ और कंपनी ने खुद गलत तरीके से 750.54 करोड़ रुपये का लाभ कमाया। अभी इस रकम की वसूली नहीं हो सकी है।

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