सज्जन जिंदल की JSW Group चाइनीज ऑटोमोबाइल कंपनी SAIC मोटर कॉरपोरेशन की एमजी मोटर इंडिया (MG Motor India) की 35 फीसदी हिस्सेदारी खरीदेगी। इस सौदे के जरिए चाइनीज ऑटोमोबाइल कंपनी को अपने निवेश पर तगड़ा रिटर्न मिलेगा। इस ज्वाइंट वेंचर से जुड़ी वित्तीय जानकारियां अभी सामने नहीं आई हैं लेकिन जानकारों के मुताबिक MG Motor के कारोबार की वैल्यू करीब 8000 करोड़ रुपये लगी है और JSW इसमें 2800 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। सौदे के तहत MG Motor India का पूरा कारोबार जेएसडब्ल्यू को ट्रांसफर हो जाएगा। ज्वाइंट वेंचर में जो शुरुआती निवेश आएगा, वह JSW Group की तरफ से प्राइमरी इक्विटी के रूप में आएगा और इसके बाद इसमें प्राइमरी इक्विटी के साथ-साथ SAIC के हिस्सेदारी की बिक्री के जरिए निवेश आएगा।
SAIC को कैसे मिलेगा तगड़ा रिटर्न
MG Motor के 8 हजार करोड़ रुपये के वैल्यूएशन पर JSW इसमें 2800 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इसके अलावा जेएसडब्ल्यू इस ज्वाइंट वेंचर में अलग-अलग समय पर निवेशकों को बुलाएगी। बाकी निवेशकों के लिए इसकी हाई वैल्यू लगेगी। अब जितनी बार इसकी हाई वैल्यू लगेगी, SAIC को इसका फायदा मिलेगा क्योंकि यह नई ज्वाइंट वेंचर कंपनी में धीर-धीरे अपनी हिस्सेदारी हल्की करेगी। इसकी योजना अगले कुछ वर्षों में लिस्ट होने की है। एक अनुमान के मुताबिक चीन की सबसे बड़ी सरकारी कार कंपनी SAIC ने भारत में अब तक 3000 करोड़ रुपये निवेश किए हैं।
MG Motor ने 2019 में शुरू किया था भारत में कारोबार
एमजी मोटर हेक्टर, ग्लॉस्ट और एस्टर ब्रांड्स के तहत SUV और ZS EV और Comet EV बेचती है। भारतीय मार्केट में इसकी 1 फीसदी से थोड़ी ही अधिक हिस्सेदारी है और अब तक इसने यहां 2 लाख कारें बेची हैं। चीन के मालिकाना हक वाले कंपनियों पर भारत में अपने पैरेंट कंपनी से निवेश लेने पर रोक लगी हुई है और MG Motor भी इसकी जद में आ गई है। इसके चलते इसे निवेशक की तलाश करनी पड़ी।
30 नवंबर को SAIC मोटर और JSW Group ने कहा कि अब दोनों मिलकर काम करेंगे। ज्वाइंट वेंचर स्थानीय स्तर पर चीजें जुटाएगी, चार्जिंग इंफ्रा में सुधार करेगी, प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाएगी और प्रोडक्ट्स बढ़ाएगी जिसमें इलेक्ट्रिक वेईकल्स पर अधिक जोर रहेगा।
एमजी इंडिया पर भारत में टैक्स चोरी और कम चालान के लिए जांच चल रही है। हालांकि कंपनी इससे इनकार कर रही है। वर्ष 2019 में इसने गुजरात में जनरल मोटर्स के हलोल प्लांट को 5 करोड़ डॉलर से भी कम में खरीदकर अपना कॉमर्शियल ऑपरेशन यहां शुरू किया था। जनरल मोटर्स ने करीब 100 करोड़ डॉलर भारत से बाहर निकलने के लिए ही इसे बेचा था।