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ESOPs Rules: क्या लिस्टेड स्टार्टअप्स के फाउंडर्स को ईसॉप्स मिलना चाहिए?

फूड डिलीवरी कंपनी जोमैटो ने हाल में अपने टॉप एग्जिक्यूटिव्स को 3,780 करोड़ रुपये के ईसॉप्स देने का ऐलान किया। इनमें कंपनी के फाउंडर दीपिंदर गोयल शामिल हैं। इससे अब इस बात पर नई बहस शुरू हो गई है कि कंपनी का फाउंडर ईसॉप्स का हकदार है या नहीं

MoneyControl Newsअपडेटेड May 20, 2024 पर 12:58 PM
ESOPs Rules: क्या लिस्टेड स्टार्टअप्स के फाउंडर्स को ईसॉप्स मिलना चाहिए?
SEBI के नियमों के मुताबिक, प्रमोटर्स को स्टॉक ऑप्शंस का हकदार नहीं माना जाता है। हालांकि, कुछ नए स्टार्टअप्स ने कंपनी लिस्ट कराने से पहले शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर में बदलाव कर देते हैं।

जोमैटो ने हाल में अपने टॉप एग्जिक्यूटिव्स को 3,780 करोड़ रुपये के ईसॉप्स देने का ऐलान किया। इनमें कंपनी के फाउंडर दीपिंदर गोयल शामिल हैं। कंपनी के इस कदम पर नई बहस शुरू हो गई है। सवाल है कि क्या स्टार्टअप्स के फाउंडर्स को ईसॉप्स मिलने चाहिए? इससे पहले पेटीएम और पीबी फिनटेक में भी ऐसा देखने को मिला था। दोनों ने अपने प्रमोटर्स को ईसॉप्स दिए थे। पीबी फिनेटक पॉलिसीबाजार डॉट कॉम की पेरेंट कंपनी है। आइए जानते हैं ईसॉप्स से जुड़े नियम क्या हैं और इस बारे में मॉइनरिटी इनवेस्टर्स की चिंता क्या है।

SEBI का नियम क्या कहता है?

SEBI के नियमों के मुताबिक, प्रमोटर्स को स्टॉक ऑप्शंस (Esops) का हकदार नहीं माना जाता है। हालांकि, कुछ नए स्टार्टअप्स (Startups) ने कंपनी लिस्ट कराने से पहले शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर में बदलाव कर देते हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि स्टार्टअप्स के फाउंडर्स प्रमोटर्स की सेबी की परिभाषा से दायरे में नहीं आए। ऐसा करने के लिए कंपनी यह घोषित करती है कि उसका संचालन प्रोफेशनल मैनेजमेंट के हाथ में है और कोई एक प्रमुख प्रमोटर नहीं है। इसके बाद फाउंडर्स सामान्य शेयरहोल्डर बन जाते हैं, जिससे वे ईसॉप्स के हकदार हो जाते हैं।

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