फ्यूचर रिटेल (Future Retail) ने लिक्विडेशन प्रोसेस शुरू करने के लिए आवेदन दिया है। कंपनी ने शेयर बाजारों को भेजी एक सूचना में यह जानकारी दी। कंपनी ने बताया कि उसके रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (RP) ने कंपनी की लिक्विडेशन के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) के पास आवेदन दिया है। यह आवेदन बीते 9 नवंबर को इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 की धारा 33 के तहत दिया गया है। लिक्विडेशन प्रक्रिया के तहत कंपनी की संपत्तियों को बेचा जाता है और उससे मिलने वाली रकम से लेनदारों का बकाया चुकाया जाता है।
फ्यूचर रिटेल की संपत्तियों को बिक्री से बचाने के लिए स्पेस मंत्रा प्राइवेट लिमिटेड ने एक समाधान योजना पेश की थी, लेकिन कर्जदाताओं की कमिटी (CoC) ने इस समाधान योजना को मंजूरी नहीं दी। इसी के बाद अब कंपनी ने लिक्विडेशन प्रोसेस के लिए आवेदन किया है।
इससे पहले कंपनी ने बीते 1 अक्टूबर को बताया था कि स्पेस मंत्रा प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दिए गए समाधान योजना को CoC के सामने मतदान के लिए रखा गया था। हालांकि ई-वोटिंग में इस योजना को जरूरी वोट नहीं मिले, जिसके बाद इसे खारिज कर दिया गया था।
स्पेस मंत्रा, एक ऑनलाइन कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन प्लेटफॉर्म है। यह कर्ज में डूबी फ्यूचर रिटेल के सबसे ऊंची बोली लगाने वाली फर्म बनकर उभरी थी। इसके अलावा इस बोली प्रक्रिया में पिनाकल एयर, लहर सॉल्यूशंस, गुडविल फर्नीचर आदि ने भी भाग लिया था।
बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्पेस मंत्रा ने फ्यूचर रिटेल के लिए ₹550 करोड़ की पेशकश की थी, जबकि लेनदारों ने करीब ₹19,400 करोड़ का दावा किया था। ऐसे में लेनदारों को यह ऑफर स्वीकार करने पर बस 3% की रिकवरी मिलती। रिपोर्ट के अनुसार, लेनदारों ने 97% की भारी कटौती से बचने के लिए स्पेस मंत्रा से सौदे को और अधिक 'आकर्षक' बनाने के लिए कहा था।
दरअसल किशोर बियानी की अगुआई वाली फ्यूचर रिटेल को रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल्स के तमाम प्रयासों के बावजूद कंपनी के लिए कोई गंभीर दावेदार नहीं मिला। करीब 49 कंपनियों ने इसे लिए बोली लगाने में दिलचस्पी दिखाई थी, लेकिन अंत में केवल छह कंपनियों ने ही बाध्यकारी प्रस्ताव दिया था।
बिग बाजार, FBB और सेंट्रल जैसे रिटेल स्टोर चलाने वाली फ्यूचर रिटेल बढ़ते कर्ज की समस्या से जूझ रही थी। कोरोना महामारी के दौरान यह कर्ज और बढ़ गया और इसके अधिकतर स्टोर बंद हो गए।