Alphabet Inc की Google ने वेब और मोबाइल फोन्स पर डिफॉल्ट सर्च इंजन बनने के लिए 2021 में दूसरी कंपनियों को 26.3 अरब डॉलर दिए थे। ब्लूमबर्ग न्यूज का कहना है कि कंपनी के एक टॉप एग्जीक्यूटिव ने गूगल के सर्च और एडवर्टाइजिंग कंट्रोल को लेकर अमेरिका के न्याय विभाग के एंटीट्रस्ट ट्रायल के दौरान इस बारे में गवाही दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्च और विज्ञापन दोनों के लिए जिम्मेदार सीनियर एग्जीक्यूटिव प्रभाकर राघवन के अनुसार, डिफॉल्ट स्टेटस के लिए Google की ओर से किए गए भुगतान की राशि 2014 के बाद से तीन गुना से अधिक हो गई है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में राघवन के हवाले से कहा गया है कि 2021 में सर्च एडवर्टाइजिंग से Google का रेवेन्यु 146.4 अरब डॉलर था, जबकि डिफॉल्ट सेटिंग के लिए भुगतान इसकी सबसे बड़ी लागत थी। CNBC की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एप्पल डिवाइसेज पर डिफॉल्ट सर्च प्रोवाइडर बनने के लिए गूगल इस साल एप्पल को 19 अरब डॉलर का भुगतान कर सकती है।
गूगल पहले कह चुकी है कि उसके रेवेन्यु शेयर एग्रीमेंट कानूनी हैं और उसने अपने सर्च और एडवर्टाइजिंग व्यवसायों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए निवेश किया है। डिफॉल्ट सर्च इंजन के मुद्दे पर कंपनी ने तर्क दिया है कि अगर लोग डिफॉल्ट सेटिंग से असंतुष्ट हैं तो वे किसी अन्य सर्च इंजन पर स्विच कर सकते हैं और करते भी हैं।
फिगर सामने लाने पर Google को थी आपत्ति
Google ने भुगतान किए गए पेमेंट की फिगर का खुलासा करने पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि ये भविष्य में कॉन्ट्रैक्ट पर बातचीत करने की कंपनी की क्षमता को नुकसान पहुंचाएंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि मामले की देखरेख कर रहे जस्टिस अमित मेहता ने फैसला सुनाया कि फिगर्स का खुलासा किया जाना चाहिए।