केंद्र सरकार ने ऑटोमोटिव सेक्टर (Automotive Sector) के लिए 25,938 करोड़ रुपये की प्रोडक्शन-लिंक्ड इनसेंटिव (PLI) स्कीम को एक साल के लिए बढ़ाने का फैसला किया है। केंद्रीय हैवी इंडस्ट्रीज मिनिस्टर, महेन्द्र नाथ पांडेय ने मंगलवार 29 अगस्त को ये जानकारी दी। इस विस्तार के बाद यह स्कीम अब वित्त वर्ष 2028 तक जारी रहेगी। मूल रूप से ऑटोमोटिव सेक्टर के लिए PLI स्कीम को वित्त वर्ष 2023 से 2027 तक के लिए था। बता दें कि केंद्र सरकार ने देश में आधुनिक ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी से जुड़े उत्पादों (वाहन और कलपुर्जों) के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 1 अप्रैल 2022 को ऑटोमोटिव सेक्टर के लिए PLI स्कीम लॉन्च किया था।
केंद्रीय मंत्री महेन्द्र नाथ पांडेय ने कहा कि सभी पक्षों के साथ स्कीम के प्रदर्शन की समीक्षा की गई है और इसके बाद इसे एक साल के लिए बढ़ाने का फैसला किया गया है। इससे पहले उन्होंने मीडिया से बात करते हुए बताया था कि मंत्रालय ने स्कीम को लेकर ऑटोमोटिव इंडस्ट्री के विभिन्न पक्षों से मिले सुझावों को स्वीकार कर लिया है।
इन सुझावों में सब्सिडी को तिमाही आधार पर देना और घरेलू वैल्यू एडिशन की जांच करने वाली एजेंसियों की संख्या को मौजूदा 2 से बढ़ाकर 4 करना शामिल है। हैवी इंडस्ट्रीज मिनिस्टर ने कहा, "हमें उम्मीद है कि इन उपायों से स्कीम को रफ्तार मिलेगी।"
महेन्द्र नाथ पांडेय ने रिव्यू मीटिंग के साथ PLI स्कीम को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सभी पक्षों से नीतियों और प्रक्रियाओं को लेकर मिलकर काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार कारोबारी माहौल को बढ़ावा देने और भारतीय ऑटोमोटिव सेक्टर की ग्रोथ में तेजी लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
मोदी सरकार ने भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए विभिन्न सेक्टर्स में प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम (PLI Scheme) की शुरुआत की है। यह योजना देश-विदेश की तमाम कंपनियों को भारत में सामान बनाने के लिए आकर्षित करने के हिसाब से सरकार ने शुरू की है। पीएलआई स्कीम के तहत केंद्र सरकार अगले 5 साल के दौरान भारत में सामान बनाने वाली कंपनियों को 1.46 लाख करोड़ रुपए का प्रोत्साहन देगी। इस स्कीम का लाभ ऑटोमोबाइल, फूड प्रोसेसिंग, टेलीकॉम और फार्मा सेक्टर सहित अन्य सेक्टर की कंपनियां उठा सकेंगी।