सरकार ग्रीन हाइड्रोजन इंडस्ट्री के लिए 2.2 बिलियन डॉलर (करीब 18,000 करोड़ रुपये) का इनसेंटिव प्रोग्राम लॉन्च करने की तैयारी में है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने तीन सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी। सरकार का लक्ष्य इसके जरिए इमिशन को कम करना और इस फील्ड एक प्रमुख एक्सपोर्टर देश बनने का है। इस इनसेंटिव प्रोग्राम से सरकार को अगले 5 सालों में ग्रीन हाइड्रोजन की उत्पादन लागत करीब 20 फीसदी तक कम होने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा आंशिक रूप से इंडस्ट्री के पैमाने को बढ़ाकर होगा। एक सूत्र ने बताया कि भारत में ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन की मौजूदा लागत करीब 300 से 400 रुपये प्रति किलो है।
अमेरिका और यूरोपीय यूनियन पहले ही अपने यहां ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स के लिए अरबों डॉलर के इनसेंटिव का ऐलान कर चुके हैं।
ग्रीन हाइड्रोजन क्या होता है?
रिपोर्ट में एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि 1 फरवरी को पेश होने वाले आगामी बजट में इस इनसेंटिव का ऐलान किया जाता है। खबर लिखे जाने तक रिन्यूएबल एनर्जी मिनिस्ट्री और वित्त मंत्रालय की तरफ से इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी।
रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंडियन ऑयल, एनटीपीसी, अडानी एंटरप्राइजेज, JSW एनर्जी और एक्मे सोलर जैसी भारतीय कंपनियों ने हाल में ग्रीन हाइड्रोजन को लेकर अपनी महत्वकाक्षाएं दिखाई हैं। अडानी ग्रुप ने जून में एक बयान में कहा था कि वह फ्रांस की कंपनी 'टोटल एनर्जीज' के साथ मिलकर 'दुनिया का सबसे बड़ा ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम' बनाएगी।
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