Yes Bank के निवेशक क्या फिर से मुश्किल में हैं? AT-1 बॉन्ड्स पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला बढ़ा सकती है कई परेशानियां

Yes Bank's AT1 Bond: बॉम्बे हाई कोर्ट ने यस बैंक के 8,415 करोड़ रुपये के एडीशनल टियर-1 (AT1) बॉन्ड्स को बट्टे खाते में डालने के फैसले को खारिज कर दिया है। इस मामले में अब आगे क्या होगा? क्या इससे Yes Bank और उसके निवेशक फिर से मुश्किलों में घिरते दिख रहे हैं

अपडेटेड Jan 26, 2023 पर 4:51 PM
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YES Bank ने AT1 बॉन्ड पर हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है

यस बैंक (Yes Bank) के निवेशकों को आने वाले दिनों में एक और झटका लग सकता है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल ही में यस बैंक के 8,415 करोड़ रुपये के एडीशनल टियर-1 (AT1) बॉन्ड्स को बट्टे खाते में डालने के फैसले को खारिज कर दिया था। बैंक ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है। लेकिन अगर सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया, तो यह Yes Bank के लिए एक नई समस्या बन सकता है और इसका असर इसके शेयरों पर भी दिख सकता है। Yes Bank के एडीशनल टियर-1 (AT1) बॉन्ड्स का मामला उस समय का है, जब बैंक अपनी अच्छी कंडीशन में था।

'सुपर फिक्स्ड डिपॉजिट' बताकर बेचे गए AT1 बॉन्ड्स

SEBI की साल 2021 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, "लगभग 1,300 से अधिक निवेशकों को 'सुपर फिक्स्ड डिपॉजिट' बताकर बैंक की ओर से एडीशनल टियर-1 (AT1) बॉन्ड्स बेचा गया था। इनमें से अधिकतर यस बैंक के ग्राहक थे।" कुल 8,415 करोड़ रुपये के AT1 बॉन्ड्स बेचे गए। निवेशकों को बताया कि इस बॉन्ड्स को खरीदने पर उन्हें जिंदगी भर रिटर्न मिलेगा, वो भी एफडी से ज्यादा। अधिक रिटर्न की लालच में अधिकतर निवेशकों ने इस बॉन्ड्स से जुड़े खतरों को नजरअंदाज कर दिया था।

मार्च 2020 में धराशायी हुआ Yes Bank


सबकुछ ठीक चल रहा था, लेकिन तभी मार्च 2020 में यस बैंक धराशायी हो गया। इसके बाद यस बैंक को बचाने के लिए RBI आगे आया और उसने बैंक के बोर्ड को भंग करके अपने नियंत्रण में लिया। बैंक से पैसे निकासी पर अस्थायी रोक लगा दी गई और स्टेट बैंक के अधिकारी प्रशांत कुमार को RBI ने बैंक का प्रशासक नियुक्त कर दिया।

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बैंक ने AT1 बॉन्ड्स को बट्टे खाते में डाला

बतौर प्रशासक प्रशांत कुमार ने 14 मार्च 2020 को बैंक के सभी 8,415 करोड़ रुपये के AT1 बॉन्ड्स को बट्टे खाते में डालने का फैसला किया। इसका मतलब है कि बैंक ने बॉन्ड्स के जरिए जमा सभी निवेश को अपने पास रख लिया और इसके बदले में बॉन्ड धारकों को ब्याज देने से मना कर दिया। AT1 बॉन्ड्स के साथ पहले से ही यह शर्त रहती है, कि अगर बैंक की वित्तीय स्थिति खराब होती है, तो वह इन बॉन्ड्स को बट्टे खाते में डाल सकता है और निवेशकों को इस पर ब्याज देने से मना कर सकता है।

निवेशकों ने फैसले को कोर्ट में दी चुनौती

हालांकि AT1 बॉन्डधारकों ने बैंक के इस फैसले को चुनौती दी। उनका कहना था कि उन्हें AT1 बॉन्ड्स से जुड़ी ऐसी किसी शर्त के बारे में बैंक ने बताया ही नहीं था और उन्हें इसे 'सुपर फिक्स्ड डिपॉजिट' बोलकर बेचा गया था।

हाई कोर्ट ने इस आधार पर बॉन्डधारकों को दी राहत

बॉम्बे हाई कोर्ट ने पिछले हफ्ते इन बॉन्डधारकों को राहत देते हुए AT1 बॉन्ड्स को बट्टे खाते में डालने के बैंक के फैसले को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि 14 मार्च 2020 को प्रशांत कुमार न ही कोई अथॉरिटी थे और न ही उनके पास ही इन बॉन्ड्स को बट्टे खाते में डालने के लिए आरबीआई से मंजूरी थी। हालांकि यह ध्यान देने वाली बात है कि हाई कोर्ट ने इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं किया कि इन बॉन्ड्स को बट्टे खाते में डालना कानूनी रूप से स्वीकार्य है या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट में जाएगा YES Bank

YES Bank को इस फैसले को चुनौती देने के लिए हाई-कोर्ट से 6 हफ्ते का समय मिला है। बैंक ने एक बयान में कहा कि उसके पास इस फैसले को चुनौती देने के लिए मजबूत कानूनी आधार है और वह इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में जाएगी।

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सुप्रीम कोर्ट को अब यहां ये तय करना है कि क्या प्रशांत कुमार 14 मार्च को AT1 बॉन्ड्स को बट्टे खाते में डालने का फैसला करने के लिए सही अथॉरिटी थे या नहीं। अगर सुप्रीम कोर्ट ने भी तकनीकी आधार पर हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा, तो यह YES Bank के लिए एक और मुश्किलों का पिटारा खोल सकता है।

YES Bank के लिए ब्याज का भुगतान होगी बड़ी चुनौती

फैसला बरकार रखने पर, YES Bank के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी इन बॉन्डधारकों को लंबी अवधि से रोके गए ब्याज का भुगतान करना। हालांकि प्रशांत कुमार ने पिछले शनिवार को दिए एक बयान में यस बैंक से तुरंत पैसा बाहर जाने की किसी संभावना से इनकार किया। उन्होंने कहा कि यह बस एक एंट्री होगा। ब्याज के भुगतान की बात आने पर, यह बैंक के पूरे विवेक पर निर्भर करता है कि वह इसका भुगतान करे या नहीं।

भुगतान रोकने पर खड़ी हो सकती हैं नई मुश्किलें

हालांकि जानकारों का कहना है कि YES Bank के लिए इन ब्याज के भुगतान रोकना मुश्किल होगा क्योंकि अब उसके सामने किसी तरह की वित्तीय चुनौती नहीं है। उसने अपने करीब 48,000 करोड़ के बैड लोन को अपने खाते से हटाकर एक एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (ARC) को ट्रांसफर कर दिया है। साथ ही उसने 8,898 करोड़ रुपये की इक्विटी कैपिटल भी हाल में जुटाई है। पिछली कुछ तिमाहियों से इसके नतीजे भी अच्छे रहे हैं।

ऐसे में अब अगर YES Bank ब्याज के भुगतान को रोकता है, तो उसके आने वाले समय में कैपिटल जुटाना मुश्किल हो सकता है। फिलहाल तो सबकी नजरें इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।

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