दिवालिया हो जाएगी Rasna? 71 लाख रुपये के इस मामले में NCLT में होगी सुनवाई

चिलचिलाती गर्मी में ठंडक पहुंचाने वाली इंस्ट्रैंट ड्रिंक मिक्स रसना (Rasna) अब दिवालिया होने की कगार पर है। यह मामला सिर्फ 71 लाख रुपये का है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में रसना की यह दलील भी नहीं काम आई और दिवालिया याचिका को मंजूर कर लिया है। जानिए यह मामला क्या है और रसना ने अपनी तरफ से क्या पक्ष रखा था

अपडेटेड Sep 02, 2023 पर 1:12 PM
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लॉजिस्टिक्स कंपनी भारत रोड के मुताबिक इसने रसना को कई सामान भेजे थे जिसकी इनवॉइस अप्रैल 2017 से अगस्त 2018 के बीच बनी थी। इसके बकाए को लेकर ही दिवालिया मामला चल रहा है।

चिलचिलाती गर्मी में ठंडक पहुंचाने वाली इंस्ट्रैंट ड्रिंक मिक्स रसना (Rasna) अब दिवालिया होने की कगार पर है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में इसके खिलाफ एक दिवालिया याचिका दायर हुआ है। यह याचिका 71 लाख रुपये के बकाए रकम से जुड़ी हुई है। इस दिवालिया याचिका को लॉजिस्टिक्स कंपनी भारत रोड कैरियर प्राइवेट लिमिटेड (Bharat Road Carrier Pvt Ltd.) ने दायर किया था। इस मामले में ट्रिब्यूनल की अहमदाबाद ने रविंद्र कुमार ने अंतरिम रिजॉल्यूशनल प्रोफेशनल के तौर पर नियुक्त कर दिया है। लॉजिस्टिक्स कंपनी के मुताबिक इसने रसना को कई सामान भेजे थे जिसकी इनवॉइस अप्रैल 2017 से अगस्त 2018 के बीच बनी थी यानी यह मामला कोरोना महामारी से काफी पहले का है।

Rasna की यह दलील भी नहीं आई काम

रसना का कहना है कि उसने नवंबर 2018 में अहमदाबाद के कॉमर्शियल कोर्ट में भारत रोड कैरियर के खिलाफ 1.25 करोड़ रुपये के नुकसान का मामला दायर किया था। मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा गया था लेकिन रसना के मुताबिक लॉजिस्टिक्स फर्म मीडिएटर यानी मध्यस्थ के सामने पेश नहीं हुई और मध्यस्थता फेल हो गई। रसना का आरोप है कि कॉमर्शियल कोर्ट ने 30 अप्रैल 2019 को नोटिस जारी किया लेकिन जवाब दाखिल करने की तारीख तक भी यह कोर्ट के सामने पेश नहीं हुई।


इंस्टैंट ड्रिंक कंपनी का कहना है कि दिवालिया याचिका के खिलाफ दो मुद्दे हैं जिसमें पहला तो ये है कि भारत कैरियर ने तथ्यों को दबाया है और दूसरा ये कि दोनों पक्षों के बीच पहले से विवाद चल रहा है। हालांकि ट्रिब्यूनल ने पाया कि भारत कैरियर ने जिस मामले में याचिका दायर किया है, उसे लेकर विवाद नहीं है और रसना ने भारत कैरियर की सर्विसेज का फायदा उठाया था।

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NCLT से इस सेक्शन के तहत भी नहीं मिल सकी राहत

रसना के खिलाफ जिस टाइम पीरियड के लिए दिवालिया याचिका दायर हुई है, वह कोरोना महामारी से पहले का है। ऐसे में ट्रिब्यूनल का कहना है कि इसे इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC Code) के सेक्शन 10ए के तहत राहत नहीं मिल सकती है। इस सेक्शन के तहत यह प्रावधान है कि कोरोना महामारी के दौरान अगर कोई कंपनी किसी बकाए को लेकर डिफॉल्ट होती है तो उसके खिलाफ दिवालिया याचिका नहीं शुरू की जाएगी। रसना के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया को एनसीएलटी ने मंजूरी दे दी है और मोरेटोरियम पीरियड भी शुरू हो गया है। यह पीरियड दिवालिया प्रक्रिया पूरी होने तक या फैसला लेने वाली अथॉरिटी रिजॉल्यूशन प्लान को मंजूरी नहीं दे देती है, तब तक रहेगा।

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