फार्मा कंपनियां Zydus और Lupin आईं साथ, मिलकर देश में इस दवा की करेंगी बिक्री

Saroglitazar Mg को भारत में सितंबर 2013 में टाइप-2 डायबिटीज वाले रोगियों में डायबिटिक डिस्लिपिडेमिया और हाइपरट्राइग्लिसराइडिमिया के इलाज के लिए लॉन्च किया गया था। तब से 15 लाख से अधिक मरीजों को इस दवा से फायदा हुआ है। Saroglitazar Mg नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर रोग और नॉन-अल्कोहॉलिक स्टीटोहेपेटाइटिस जैसी लिवर की पुरानी बीमारियों के इलाज के लिए जाइडस की एक इनोवेटिव दवा है

अपडेटेड Nov 04, 2023 पर 12:42 PM
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ल्यूपिन के पास LINVAS ब्रांड नाम के तहत भारत में इस प्रोडक्ट को की-मार्केटिंग का सेमी-एक्सक्लूसिव अधिकार होगा।

फार्मा कंपनियों ल्यूपिन लिमिटेड (Lupin Limited) और जाइडस लाइफसाइंसेज लिमिटेड (Zydus Lifesciences Limited) के बीच एक लाइसेंसिंग और सप्लाई एग्रीमेंट हुआ है। यह एग्रीमेंट भारत में नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर रोग और नॉन-अल्कोहॉलिक स्टीटोहेपेटाइटिस के इलाज के लिए Saroglitazar Mg दवा को मिलकर बेचने के लिए है। समझौते के तहत, ल्यूपिन के पास LINVAS ब्रांड नाम के तहत भारत में इस प्रोडक्ट को की-मार्केटिंग का सेमी-एक्सक्लूसिव अधिकार होगा।

दोनों कंपनियों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि जाइडस ने Saroglitazar Mg को Lipaglyn और Bilypsa ब्रांड नामों के तहत लॉन्च किया है और वह उनकी बिक्री करती रहेगी। डीसीजीआई की मंजूरी प्राप्त Saroglitazar Mg नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर रोग और नॉन-अल्कोहॉलिक स्टीटोहेपेटाइटिस जैसी लिवर की पुरानी बीमारियों के इलाज के लिए जाइडस की एक इनोवेटिव दवा है। बयान में कहा गया है कि भारत इन अधूरी चिकित्सा जरूरतों के लिए दवा को मंजूरी देने वाला पहला देश बन गया है।

मरीजों के लिए ज्यादा सुलभ हो सकेगी दवा


बयान में कहा गया है कि ल्यूपिन पूर्व-निर्धारित माइलस्टोन की उपलब्धि पर जाइडस को लाइसेंस शुल्क और माइलस्टोन पेमेंट्स का भुगतान करेगी। ल्यूपिन के मैनेजिंग डायरेक्टर नीलेश गुप्ता ने कहा कि यह साझेदारी कंपनी के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी पोर्टफोलियो को और बढ़ाएगी, मरीजों और मेडिकल प्रोफेशनल्स को हेल्थकेयर विकल्पों तक बेहतर पहुंच प्रदान करेगी। जाइडस के मैनेजिंग डायरेक्टर शरविल पटेल ने कहा कि ल्यूपिन के साथ साझेदारी से इस नई दवा की पहुंच का विस्तार होगा।

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Saroglitazar Mg भारत में सितंबर 2013 में हुई थी लॉन्च

Saroglitazar Mg को भारत में सितंबर 2013 में टाइप-2 डायबिटीज वाले रोगियों में डायबिटिक डिस्लिपिडेमिया और हाइपरट्राइग्लिसराइडिमिया के इलाज के लिए लॉन्च किया गया था। ये अकेले स्टैटिन द्वारा नियंत्रित नहीं होते हैं। कंपनियों ने कहा कि तब से 15 लाख से अधिक मरीजों को इस दवा से फायदा हुआ है।

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