डिजिटल पेमेंट्स और फाइनेंशियल सर्विसेज यूनिकॉर्न फोनपे (PhonePe) 100 करोड़ डॉलर के फंडिंग राउंड में 20 करोड़ डॉलर और जुटा चुकी है। इससे पहले वह 45 करोड़ डॉलर जुटा चुकी थी। फोनपे को ताजा निवेश इसकी सबसे बड़ी शेयरहोल्डर वालमार्ट से मिला है। वालमार्ट ने इसमें 20 करोड़ डॉलर (1649.24 करोड़ रुपये) निवेश किया है। फोनपे ने जनवरी में 1200 करोड़ डॉलर (98954.16 करोड़ रुपये) के वैल्यूएशन पर 100 करोड़ डॉलर (8246.18 करोड़ रुपये) जुटाने का ऐलान किया था। इसके तहत कंपनी ने जनरल अटलांटिक से 35 करोड़ डॉलर (2886.16 करोड़ रुपये) के साथ-साथ टाइगर ग्लोबल मैनेजमेंट, रिबिट कैपिटल और टीवीएस कैपिटल से 10 करोड़ डॉलर (824.62 करोड़ रुपये) हासिल किए थे। कंपनी को अभी और निवेश मिलने की उम्मीद है। 100 करोड़ डॉलर के लक्ष्य से अभी यह 35 करोड़ डॉलर (2885.94 करोड़ रुपये) दूर है।
PhonePe क्यों जुटा रही है फंड
फोनपे के मुताबिक इस फंड का इस्तेमाल कंपनी के पेमेंट्स और इंश्योरेंस बढ़ाने में किया जाएगा और इसके साथ लेंडिंग, स्टॉकब्रोकिंग, ओएनडीसी (ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स) पर आधारित शॉपिंग औरअकाउंट एग्रीगेटर्स जैसे नए कारोबार भी आक्रामक तरीके शुरू किए जाएंगे। नए कारोबार को अगले कुछ वर्षों में शुरू करने की योजना है। यह लेंडिंग कारोबार की शुरुआत ऐसे समय में करने जा रही है जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeiTY) ने कर्ज देने वाले ऐप्स पर सख्ती की है।
भारत शिफ्ट होने के बाद पहली बड़ी फंड जुटाने की योजना
फोनपे को 2015 में फ्लिपकार्ट के पूर्व एंप्लॉयीज समीर निगम, राहुल चारी और बुर्जिन इंजीनियर ने शुरू किया था। अगले ही साल 2016 में फ्लिपकार्ट ने इसे खरीद लिया था और कंपनी सिंगापुर शिफ्ट हो गई थी। इसके बाद जब वालमार्ट ने फ्लिपकार्ट को खरीद लिया तो यह वालमार्ट के हाथ चली गई। पिछले साल फोनपे को फ्लिपकार्ट से अलग कर भारत शिफ्ट कर दिया गया। फ्लिपकार्ट से अलग होने और भारत शिफ्ट होने के बाद फोनपे पहली बार भारी-भरकम फंड जुटा रही है।
इसके कारोबार की बात करें तो यूपीआई ट्रांजैक्शंस के मामले में 47 फीसदी मार्केट शेयर के साथ यह मार्केट लीडर है। इसक 40 करोड़ से अधिक रजिस्टर्ड यूजर्स हैं। कंपनी अपने कारोबार का लगातार विस्तार कर रही है। 2017 में इसने फाइनेंशियल सर्विसेज की शुरुआत की जिससे इसके ग्राहकों को गोल्ड खरीदने, इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने और म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने जैसी सर्विसेज मिली। इसके पहले बिल और यूटिलिटी पेमेंट्स की सुविधा ही थी।