GIFT City ग्रोथ के अगले चरण में, पीएम मोदी के फ्लैगशिप प्रोजेक्ट की ये है बड़ी-बड़ी योजनाएं
देश का सबसे नया फाइनेंशियल हब और पीएम मोदी का नया फ्लैगशिप प्रोजेक्ट GIFT City अब ग्रोथ के अगले चरण की तैयारी कर रहा है। गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक (GIFT) सिटी का पहला चरण करीब तीन साल पहले वर्ष 2020 में तब शुरू हुआ था, जब एक नया रेगुलेटर इंटरनेशनल फाइनेंस सर्विसेज अथॉरिटी (IFSA) को बनाया गया था। IFSCA के चेयरमैन के राजारमन ने इसके सफर, ग्रोथ की योजनाओं और चुनौतियों के बारे में चर्चा की
गिफ्ट सिटी की शुरुआत वर्ष 2007 में पूरी तरह से ग्रीनफील्ड एक्सपेरिमेंट के रूप में हुई थी जब पीएम नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे।
देश का सबसे नया फाइनेंशियल हब और पीएम मोदी का नया फ्लैगशिप प्रोजेक्ट GIFT City अब ग्रोथ के अगले चरण की तैयारी कर रहा है। गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक (GIFT) सिटी का पहला चरण करीब तीन साल पहले वर्ष 2020 में तब शुरू हुआ था, जब एक नया रेगुलेटर इंटरनेशनल फाइनेंस सर्विसेज अथॉरिटी (IFSA) को बनाया गया था। इसका लक्ष्य भारत से जुड़ी ट्रेडिंग दुबई, मॉरीशस या सिंगापुर की बजाय देश से करने का है। इसे लेकर IFSCA के चेयरमैन के राजारमन (K Rajaraman) ने ब्लूमबर्ग न्यूज से बातचीत में इसके सफर, ग्रोथ की योजनाओं और चुनौतियों के बारे में चर्चा की जिसके बारे में नीचे दिया जा रहा है। राजारमन को अगस्त मे इसकी कमान सौंपी गई थी।
कैसा रहा GIFT IFSCA का अब तक का सफर
गिफ्ट सिटी की शुरुआत वर्ष 2007 में पूरी तरह से ग्रीनफील्ड एक्सपेरिमेंट के रूप में हुई थी जब पीएम नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। 2020 में सरकार ने IFSCA को एक यूनिफाईड रेगुलेटर के रूप में बनाया। इसने अब तक एयरक्राफ्ट लीजिंग, शिप लीजिंग समेत कई इंडस्ट्रीज के लिए 30 से अधिक नियम जारी किए हैं। फाइनेंशियल डोमेन में बात करें तो अब इसके दायरे में बैंक, फंड्स, कैपिटल मार्केट्स और इंश्योरेंस हैं। सितंबर 2020 में यहां सिर्फ 129 ही रजिस्टर्ड एंटिटीज थीं जो अब सितंबर 2023 में बढ़कर 550 पर पहुंच गई हैं। इस दौरान बैंकों की संख्या 13 से बढ़कर 25 हो गई। यहां दो इंटरनेशनल स्टॉक एक्सचेंज हैं जिन पर इंडेक्स, स्टॉक, करेंसी और कमोडिटी डेरिवेटिव्स समेत कई प्रोडक्ट कैटेगरीज में 20 से अधिक घंटे तक ट्रेडिंग होती है।
डेट मार्केट में बात करें तो 30 सितंबर 2023 तक GIFT IFSC स्टॉक एक्सचेंज पर 5270 करोड़ डॉलर के कम्यूलेटिव डेट लिस्ट हुए थे। इसमें से 1018 करोड़ डॉलर का डेट पर्यायवरण, सोशल और गवर्नमेंट बॉन्ड्स से जुड़ा हुआ है। महंगाई और ब्याज दरों से जुड़ी चिंताओं के कम होने के चलते यहां के बॉन्ड मार्केट में तेजी की उम्मीद है।अब यह ग्रोथ के अगले चरण में है, जहां दुनिया भर की कंपनियां आ सकती है।
GIFT IFSC की योजना एक ऐसा माहौल तैयार करने की है जहां टैक्स और पॉलिसी को लेकर निश्चितता हो और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस यानी कारोबार शुरू करना आसान हो जिससे विदेशी कंपनियां यहां आ सकें। इसकी योजना एक सिंगल विंडो आईटी सिस्टम लाने की है जिससे एक ही जगह कंपनियों को सभी नियामकीय मंजूरी मिल जाएगी। यह जनवरी में लॉन्च हो सकता है।
इसके सभी योजनाओं की बात करें तो पहली योजना तो ये है कि IFSC के एक्सचेंजों पर अनलिस्टेड भारतीय कंपनियों की सीधे लिस्टिंग हो सके। दूसरी योजना इसे री-इंश्योरेंस हब बनाने की है, तीसरी योजना इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर में बुककीपिंग, अकाउंटिंग, टैक्सेशन और फाइनेंशियल क्राइम कंप्लॉयंसेज सर्विसेज एनेबल करने की है। चौथी योजना GIFT IFSC की कंपनियों के रजिस्ट्रेशन और अप्रूवल के लिए सिंगल विंडो आईटी सिस्टम, पांचवी योजना अधिग्रणहण के लिए फाइनेंसिंग की मंजूरी की है।
यहां उन विदेशी यूनिवर्सिटीज को भी लाने की योजना है जो कैंपस सेट अप करना चाहती हैं। यह एक पेमेंट सर्विसेज रेगुलेशन लाने वाला है जिससे बैंक तत्काल मंजूरी दे सकेंगे। इससे फाइनेंशियल इकोसिस्टम और बेहतर होगा। हालांकि इसमें अभी करीब छह महीने का समय लग सकता है।
इसके अलावा पेंशन सेक्टर के लिए भी कुछ योजनाएं हैं। कई भारतीय ऐसे हैं जो विदेश में रहते हैं और वे डॉलर के रूप में अपनी कमाई बचाना चाहते हैं तो इसे मौके के तौर पर भुनाया जा सकता है। एक टीम इस पर काम कर रही है और यह दिसंबर तक अपनी रिपोर्ट पेश करेगी जिसके बाद पेंशन से जुड़े नियम जारी किए जाएंगे। इसके बाद विदेशों में रह रहे लोग यहां पेंशन के रूप में अपनी बचत कर सकते हैं।
देश में कई स्टार्टअप और टेक कंपनियां ऐसी हैं, जो लिस्टेड नहीं हैं। उन्हें आमतौर पर वैसा वैल्यूएशन नहीं मिलता है जैसा उन्हें इंटरनेशनल मार्केट में मिलता है। ऐसे में गिफ्ट सिटी में डायरेक्ट लिस्टिंग से उन्हें यह फायदा मिलेगा कि विदेशी प्लेयर्स यहां वे शेयर खरीदने आएंगे जिनके भाव विदेशी करेंसी में हैं। इसे लेकर उम्मीद है कि वित्त मंत्रालय जल्द ही नियम जारी कर सकता है।
कार्बन क्रेडिट्स की ट्रेडिंग हो सकती है शुरु
एक महीने से अधिक समय पहले दो कमेटियां बनाई गई थीं जो वालंटरी कार्बन क्रेडिट मार्केट पर नजर रख रही हैं। भारत कार्बन क्रेडिट का बड़ा प्रोड्यूसर है और यह बहुत सारे कार्बन क्रेडिट निर्यात करता है। ऐसे में यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्बन क्रेडिट की ट्रेडिंग के लिए एक प्लेटफॉर्म बनाने का मौका है। इस पर काम किया जा रहा है। उम्मीद है कि इस पर कमेटी दो महीने के भीतर रिपोर्ट पेश कर देगी।
GIFT IFSC पर एकाएक इतने ज्यादा आवेदन आए कि यह इसके इंफ्रा डेवलपमेंट से भी अधिक रहा। हालांकि जल्द ही अहम इंवेंटरी आने वाली है। IFSCA के चेयरमैन के मुताबिक यह सिर्फ नियामक ही नहीं है बल्कि इसे डेवलपर की दोहरी भूमिका भी निभानी होती है। चेयरमैन के मुताबिक सभी स्टेकहोल्डर्स के लिए यह अहम है कि वे बेहतर तरीके से और तेज गति से डिलीवरी कर सकें। उन्होंने उम्मीद जताई है कि यह स्पीड आगे भी जारी रहेगी।