2023 अब बस खत्म होने को ही है। यह साल अपने अंत तक पहुंचते-पहुंचते, भारत के प्राइवेट क्रेडिट सेक्टर (Private Credit Sector) के लिए इतिहास के सबसे अच्छे वर्षों में से एक बन गया है। यह इस बात से साबित होता है कि साल 2023 की अकेली पहली छमाही यानी जनवरी-जून में ही 63 सौदों में 5.1 अरब डॉलर का निवेश आ गया था। यह बात Praxis Global Alliance और IVCA की एक रिपोर्ट में कही गई है। कंपनियों को 6 प्रमुख स्थितियों में प्राइवेट क्रेडिट की जरूरत होती है। ये 6 स्थितियां हैं- बैंक लेंडिंग पर रेगुलेटरी रोक, फ्लेक्सिबल फाइनेंसिंग सॉल्यूशंस की जरूरत, प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग, रेवेन्यू बेस्ड फाइनेंसिंग, प्रमोटर्स का इक्विटी डायल्यूशन न चाहना और लो क्रेडिट रेटिंग वाली मिड/स्मॉल कंपनियां।
