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कर्मचारियों पर निवेश नहीं कर रहे प्राइवेट बैंक, यही टैलेंट क्राइसिस की बड़ी वजह: SBI चेयरमैन सीएस शेट्टी

कोरोना महामारी के बाद से भारतीय बैंकिंग सेक्टर में टैलेंट और लीडरशिप की कमी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। बीते तीन–चार सालों में बैंकिंग इंडस्ट्री में 30–35 प्रतिशत तक की ऊंची एट्रिशन दर देखी गई है। इस पूरे मुद्दे पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने प्राइवेट सेक्टर बैंकों पर सीधा सवाल उठाया है

Edited By: Vikrant singhअपडेटेड Dec 22, 2025 पर 1:10 PM
कर्मचारियों पर निवेश नहीं कर रहे प्राइवेट बैंक, यही टैलेंट क्राइसिस की बड़ी वजह: SBI चेयरमैन सीएस शेट्टी
सीएस शेट्टी, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के चेयरमैन

कोरोना महामारी के बाद से भारतीय बैंकिंग सेक्टर में टैलेंट और लीडरशिप की कमी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। बीते तीन–चार सालों में बैंकिंग इंडस्ट्री में 30–35 प्रतिशत तक की ऊंची एट्रिशन दर देखी गई है। इस पूरे मुद्दे पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने प्राइवेट सेक्टर बैंकों पर सीधा सवाल उठाया है। मनीकंट्रोल के साथ इंटरव्यू में सीएस शेट्टी ने कहा कि बैंकिंग सेक्टर में टैलेंट की समस्या की बड़ी वजह यह है कि कई बैंक, खासकर प्राइवेट सेक्टर बैंक, अपने ह्यूमन रिसोर्सेज में निवेश करने से बचते हैं।

पब्लिक और प्राइवेट बैंकों के बीच बुनियादी फर्क

सीएस शेट्टी के मुताबिक, पब्लिक सेक्टर बैंक और प्राइवेट सेक्टर बैंक के काम करने के तरीके में बुनियादी अंतर है। उन्होंने कहा, “हमें अपने लोगों में निवेश करना होगा, ताकि वे इंडस्ट्री के लिए तैयार हो सकें। मुझे नहीं लगता कि, खासतौर से प्राइवेट सेक्टर के कई बैंक ऐसा कर रहे हैं। यही पब्लिक सेक्टर और प्राइवेट सेक्टर बैंकों के बीच सबसे बड़ा फर्क है।”

शेट्टी ने बताया कि पब्लिक सेक्टर बैंक, नए लोगों को भर्ती करके उन्हें दो साल तक ट्रेनिंग देते हैं, ताकि वे बैंकिंग की जटिलताओं को सही तरीके से समझ सकें और जिम्मेदारियां निभा सकें। वहीं, कई प्राइवेट बैंक यह मानकर चलते हैं कि नई भर्ती पहले से ही पूरी तरह तैयार है, जो कि वास्तविकता नहीं है।

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