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M&A Funding: पूरी हुई कॉरपोरेट की पुरानी मांग, मर्जर के लिए भी ले सकेंगे बैंकों से लोन, लेकिन इन शर्तों के साथ

M&A Funding: केंद्रीय बैंक RBI की एक मंजूरी से न सिर्फ कॉरपोरेट वर्ल्ड बल्कि बैंकों की भी लंबे समय से हो रही मांग पूरी हो गई। अब बैंक M&A (मर्जर एंड एक्विजिशंस) के लिए फंडिंग कर सकेंगे। जानिए नए फ्रेमवर्क के तहत बैंकों से M&A के लिए फंडिंग की शर्तें क्या हैं और अभी इसकी फंडिंग कैसी होती है?

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Feb 14, 2026 पर 9:21 AM
M&A Funding: पूरी हुई कॉरपोरेट की पुरानी मांग, मर्जर के लिए भी ले सकेंगे बैंकों से लोन, लेकिन इन शर्तों के साथ
बैंक नए फ्रेमवर्क के तहत एक्विजिशन वैल्यू का 75% तक फाइनेंस कर सकेंगे। (Photo- Pexels)

M&A Funding: बैंकिंग और कॉरपोरेट क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही मांग आखिरकार पूरी हुई। RBI ने औपचारिक तौर पर अधिग्रहण के लिए बैंकों को लोन बांटने की मंजूरी दे दी है। पिछले साल अक्टूबर में जारी मसौदे पर फीडबैक हासिल करने के बाद कैपिटल मार्केट एक्सपोजर (CME) के नियमों को फाइनल किया गया है और अब इससे पहली बार स्पष्ट रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत बैंकों को विलय और अधिग्रहण के लिए फंडिंग का रास्ता खुल गया है। नए नियम अगले वित्त वर्ष 2027 से लागू होंगे। इससे कॉरपोरेट वर्ल्ड में बड़ा बदलाव आ सकता है। अभी इसके लिए कंपनियों को NBFC, प्राइवेट क्रेडिट फंड्स और विदेशी लेंडर्स पर निर्भर रहना पड़ता है।

नए फ्रेमवर्क के तहत प्रमुख प्रावधान

बैंक नए फ्रेमवर्क के तहत एक्विजिशन वैल्यू का 75% तक फाइनेंस कर सकेंगे।

इसके तहत यह जरूरी किया गया है कि अधिग्रहण करने वाली कंपनी को कम से कम 25% राशि अपनी इक्विटी से लगानी होगी ताकि प्रमोटर की पर्याप्त हिस्सेदारी सुनिश्चित हो।

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