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RBI ने धड़ल्ले से लोन बांट रही NBFC कंपनियों पर बढ़ाई सख्ती, मांगा लोन-बुक का पूरा ब्योरा

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने चुनिंदा नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFCs) से उनकी लोन बुक ग्रोथ पर विस्तार से जानकारी मांगी है। इससे पूरे सेक्टर की वित्तीय सेहत और संभावित क्रेडिट बबल को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, RBI ने इन कंपनियों से उनके बकाया लोन पोर्टफोलियो का पूरा डिटेल मांगा है, जिसमें लोन की कैटेगरी और उन पर लगने वाले ब्याज दरों का भी ब्योरा शामिल है

Moneycontrol Newsअपडेटेड Sep 16, 2024 पर 2:15 PM
RBI ने धड़ल्ले से लोन बांट रही NBFC कंपनियों पर बढ़ाई सख्ती, मांगा लोन-बुक का पूरा ब्योरा
RBI इस बात पर ध्यान दे रहा है कि क्या कुछ लोन कैटेगरी की ग्रोथ टिकाऊ और सिस्टम के मानकों के मुताबिक है

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने चुनिंदा नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFCs) से उनकी लोन बुक ग्रोथ पर विस्तार से जानकारी मांगी है। इससे पूरे सेक्टर की वित्तीय सेहत और संभावित क्रेडिट बबल को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, RBI ने इन कंपनियों से उनके बकाया लोन पोर्टफोलियो का पूरा डिटेल मांगा है, जिसमें लोन की कैटेगरी और उन पर लगने वाले ब्याज दरों का भी ब्योरा शामिल है। RBI ने जिन ब्याज दरों वाली कैटेगरी की समीक्षा करने का निर्देश दिया है, उनमें 10% से कम, 10-20%, 20-30%, 30-40%, 40-50%, और 50% से अधिक की ब्याज दरें शामिल हैं।

रिपोर्ट में NBFC इंडस्ट्री के कई सीनियर एग्जिक्यूटिव्स के हवाले से बताया गया कि RBI खास तौर पर इस बात पर ध्यान दे रहा है कि क्या कुछ प्रोडक्ट कैटेगरी की ग्रोथ टिकाऊ और सिस्टम के मानकों के मुताबिक है। इसके साथ ही, रेगुलेटर यह भी देख रहा है कि क्या NBFCs की ओर से ली जा रही ब्याज दरें बहुत ज्यादा हैं और कहीं वे फेयर प्रैक्टिस कोड का उल्लंघन तो नहीं कर रही हैं।

RBI ने इससे पहले भी क्रेडिट बबल को रोकने के लिए हाल ही में कई उपायों का ऐलान किया था। नवंबर 2023 में, RBI ने सभी रेगुलेटेड संस्थाओं को उनके कंज्यूमर क्रेडिट के लिमिट की समीक्षा करने का निर्देश दिया था। साथ ही कई सेगमेंट में इन लिमिट की अधिकतम सीमा को भी तय करने का निर्देश दिया था। ये निर्देश खासतौर से अनसिक्योर्ड कंज्यूमर क्रेडिट को ध्यान में रखकर दिए गए थे, जिसे 29 फरवरी 2024 से लागू करना अनिवार्य है।

RBI ने जून 2024 में फाइनेंशियल स्टैबिलिटी नाम से एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें कंज्यूमर क्रेडिट सेगमेंट को लेकर गंभीर चिंता जताई गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि 50,000 रुपये से कम के लोन वाले बॉरोअर्स में डिफॉल्ट रेट काफी ज्यादा है। साथ ही जिन NBFC या फिनटेक कंपनी की इस सेगमेंट में बड़ी हिस्सेदारी है, उनका डिफॉल्ट रेट भी ऊंचा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि कंज्यूमर क्रेडिट सेगमेंट के आधे से ज्यादा बॉरोअर्स के पास लोन मिलते वक्त पहले से 3 एक्टिव लोन होते हैं। वहीं एक-तिहाई से ज्यादा बॉरोअर्स ने पिछले छह महीनों में तीन से अधिक लोन लिए हैं।

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