Mukesh Ambani Reliance Journey: रिलायंस इंडस्ट्रीज की कमान संभालने के लिए मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) ने 20 साल पहले स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी और अब उनकी अगुवाई में रिलायंस (Reliance) देश के कारोबारी जगत की दिशा तय कर रहा है। 65 वर्षीय अंबानी की पहचान ऐसे कारोबारी के रूप में है जो अवसरों का इंतजार नहीं करते हैं बल्कि इसे खुद तैयार करते हैं। मुकेश अंबानी के नेतृत्व में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ऐसी कई उपलब्धियां हासिल की हैं जो किसी भारतीय कंपनी के लिए पहली बार रहा।
2007 में इसने 10 हजार करोड़ डॉलर के मार्केट कैप का आंकड़ा पार किया। इसकी टेलीकॉम इकाई रिलायंस जियो (Reliance Jio) के करीब 40 करोड़ सब्सक्राइबर्स है। यह देश के सबसे बड़ी हाइड्रोकॉर्बन कंपनियों में शुमार है और अब यह दुनिया की सबसे बड़ी पेट्रोलियम रिफाइनरी बना रही है। रिलायंस रिटेल (Reliance Retail) देश की सबसे बड़ी ऑर्गेनाइज्ड रिटेल कंपनी है। यह दुनिया के 500 कंपनियों की फॉर्च्यून की सूची में शामिल होने वाली पहली भारतीय कंपनी है।
Mukesh Ambani ने ग्रोथ से लेकर क्षमताओं को फिर से किया डिफाइन
आरपीएसजी ग्रुप के चेयरमैन संजीव गोयनका कहा है कि अंबानी ने स्केल, एफिशिएंसीज और ग्रोथ से फिर डिफाइन किया। उनके साथ काम कर चुके लोगों का मानना है कि कारोबारी जगत में अगला कदम कहां और कैसे रखना है, यह अंबानी को बखूबी पता है। इंडस्ट्रियलिस्ट हर्ष गोयनका करीब चालीस वर्षों से एक-दूसरे को जानते हैं और ऊषा किरण के अपार्टमेंट्स में रहने के दौरान पड़ोसी भी रहे हैं, उनका कहना है कि अंबानी भविष्य को अलग ही नजरिए से देखते हैं। गोयनका का कहना है कि दस साल पहले जब अंबानी ने जियो का जिक्र किया था तो किसी को अंदाजा नहीं था कि यह किस कदर देश की टेलीकॉम इंडस्ट्री को लीड करेगा।
आज अंबानी जिस कारोबार में हाथ डाल रहे हैं, उसे लेकर लोगों का रुझान पॉजिटिव है लेकिन हमेशा ऐसा नहीं था। गोयनका के मुताबिक जब रिलायंस ने रिटेल कारोबार में हाथ डाला तो इसकी सफलता पर संदेह किया गया क्योंकि इसमें कई प्रोफेशनल्स ने हाथ डाला और हाथ जलाकर निकल गए। हालांकि अंबानी ने इसमें भी शानदार सफलता हासिल की और रिलायंस रिटेल आज देश की सबसे बड़ी ऑर्गेनाइज्ड रिटेल कंपनी है।
Mukesh Ambani में क्या है अलग, जो बनाती है खास
लॉ फर्म एजेडबी एंड पार्टनर्स की फाउंडिंग पार्टनर Zia Mody के मुताबिक अंबानी में अत्यधिक हाई आईक्यू (इंटेलीजेंट कोशेंट) और ईक्यू (इमोशनल कोशेंट) का यूनिक कांबिनेशन है। जिया के मुताबिक अंबानी को अन्य लीडर्स की तुलना में जो क्वालिटी अलग करती है, वह है फोकस। जिया का कहना है कि अंबानी किसी भी मसले पर बहुत ध्यान देते हैं और दूसरों की क्षमताओं का बहुत सम्मान करते हैं। कारोबारी चर्चा के दौरान वह ध्यानपूर्वक सामने वाले की बातों को सुनते हैं और फिर फैसला लेते हैं। एसबीआई की पूर्व चेयरमैन और अब रिलायंस के बोर्ड में शामिल अरुधंति रॉय का कहना है कि अन्य की तुलना में तकनीक को जल्द अपनाने की वजह ने भी रिलायंस को आगे बढ़ाने में मदद की है।
20 वर्षों में क्या हुआ है बदलाव
मुकेश अंबानी पिछले 20 वर्षों से रिलायंस की अगुवाई कर रहे हैं। इन 20 वर्षों में उनके नेतृ्त्व के तरीके में क्या बदलाव आया है, इसे लेकर जिया का कहना है कि इन वर्षो में उनके रिस्क एनालाइज करने, अधिक से अधिक लोगों से राय लेने की और हर चीज को वैश्विक नजरिए से देखने की क्षमता में विस्तार हुआ है। सबसे अहम यह है कि इसने सफल उद्यमियों के देश के रूप में भारत की तस्वीर को मजबूत किया है। लॉ फर्म खेतान एंड कंपनी के एमडी Haigreve Khaitan के मुताबिक अगर भारत को 21वीं सदी में ले जाने वाले विजनरीज की लिस्ट बनाई जाए तो उसमें अंबानी टॉप के लोगों में शुमार होंगे।
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