गन्ना उत्पादन में इस साल 20% की आ सकती है कमी, मानसून में अनियमित बारिश ने बढ़ाई चिंता: श्री रेणुका

देश की सबसे बड़ी शुगर कंपनियों में से एक श्री रेणुका शुगर्स ने इस साल गन्ने की पैदावार में करीब 20 फीसदी की गिरावट आने का अनुमान जताया है। कंपनी के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर, विजेंद्र सिंह ने मनीकंट्रोल को बताया मानसून सीजन के दौरान हुई अनियमित बारिश इस साल गन्ना उत्पादन कम रहने की उम्मीद है। विजेंद्र ने कहा कि इस साल बारिश अनियमित रही। खासतौर से अगस्त सूखा रहा और फिर अक्टूबर भी अभी तक सूखा ही जा रहा है

अपडेटेड Oct 18, 2023 पर 3:06 PM
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भारत में इस साल पिछले करीब 5 सालों का सबसे कमजोर मानसून रहा है

देश की सबसे बड़ी शुगर कंपनियों में से एक श्री रेणुका शुगर्स (Shree Renuka Sugars) ने इस साल गन्ने की पैदावार (Sugarcane Production) में करीब 20 फीसदी की गिरावट आने का अनुमान जताया है। कंपनी के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर, विजेंद्र सिंह ने मनीकंट्रोल को बताया मानसून सीजन के दौरान हुई अनियमित बारिश इस साल गन्ना उत्पादन कम रहने की उम्मीद है। विजेंद्र ने कहा, "इस साल बारिश अनियमित रही। खासतौर से अगस्त सूखा रहा और फिर अक्टूबर भी अभी तक सूखा ही जा रहा है। इससे महाराष्ट्र और कर्नाटन में गन्ने के उत्पादन पर काफी असर पजडा है।" हालांकि उन्होंने साथ में यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में असमान्य बारिश से गन्ने के फसल पर कोई खास असर नहीं पड़ा है।

गन्ना पैदावार के मामले में उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र देश के तीन सबसे बड़े राज्य हैं। देश का 80 प्रतिशत गन्ना इन्हीं तीनों राज्यों से आता है। पिछले पेराई सीजन (1 अक्टूबर 2022 - 30 सितंबर 2023) में देश के गन्ने की पैदावार 50 करोड़ टन को पार कर गई थी।

भारत में इस साल पिछले करीब 5 सालों का सबसे कमजोर मानसून रहा है। ऐसे में कृषि पैदावार में किसी भी तरह की कमी से सरकार पर आगामी चुनावों से पहले खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी को मैनेज करने का बोझ बढ़ जाएगा।


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सिंह ने कंपनी की ओर से उठाए कदमों का जिक्र करते हुए कहा, "हम अपने किसानों को कम पानी के इस्तेमाल के साथ गन्ने की खेती करने के तरीके को लेकर शिक्षित करने का प्रयास करते हैं।" अनियमित बारिश से जहां कुछ इलाकों को पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं यूपी जैसे क्षेत्रों में पर्याप्त भूजल की उपलब्धता है, जिसके चलते वे सूखे के प्रति कम संवेदनशील होते हैं।

देश में चीनी की कीमतें बढ़ने से रोकने के लिए सरकार ने चीनी की विभिन्न किस्मों के निर्यात की तय सीमा को जारी रखने का फैसला किया। इसमें कच्ची, सफेद, रिफाइंड और ऑर्गेनिक चीनी शामिल हैं। हालांकि यूरोपीय यूनियन और अमेरिका को होने वाले शुगर एक्सपोर्ट पर यह सीमा नहीं लागू होती है। विजेंद्र सिंह ने कहा, "यह सही भी है। अगर किसी देश में खास कमोडिटी की कमी है तो उस देश को प्राथमिकता मिलती है और हमारे कंज्यूमर भी बदले में प्राथमिकता पाते हैं।"

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