सीमेंस इंडिया ने रेलवे के साथ ₹26,000 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट पर किया साइन, 1200 इलेक्ट्रिक रेल इंजन बनाएगी कंपनी

रेल मंत्रालय के साथ 9000 ‘हॉर्स पॉवर’ के 1,200 इलेक्ट्रिक इंजन बनाने का कॉन्ट्रैक्ट, भारत में भारत में सीमेंस लिमिटेड को मिला अबतक का सबसे बड़ा ऑर्डर है। इन 1,200 इंजनों को अलगे 11 साल में बनाया जाएगा। साथ ही कॉन्ट्रैक्ट में अगले 35 सालों तक इनका पूर्ण रख-रखाव भी शामिल है

अपडेटेड Jan 16, 2023 पर 8:13 PM
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इन आधुनिक रेल इंजनों का इस्तेमाल माल ढुलाई में किया जाएगा

सीमेंस इंडिया (Siemens India) ने रेलवे के लिए 1,200 इलेक्ट्रिक मालगाड़ी ट्रेनों का इंजन बनाने के कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किया है। यह पूरा कॉन्ट्रैक्ट करीब 26,000 करोड़ रुपये का है। कंपनी ने सोमवार 16 जनवरी को जारी एक बयान में इसकी जानकारी दी। बयान में कहा गया है कि रेल मंत्रालय के साथ 9000 ‘हॉर्स पॉवर’ के 1,200 इलेक्ट्रिक इंजन बनाने का कॉन्ट्रैक्ट, भारत में भारत में सीमेंस लिमिटेड को मिला अबतक का सबसे बड़ा ऑर्डर है। इन 1,200 इंजनों को अलगे 11 साल में बनाया जाएगा। साथ ही कॉन्ट्रैक्ट में अगले 35 सालों तक इनका पूर्ण रख-रखाव भी शामिल है।

सीमेंस इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ सुनील माथुर ने बताया, "9,000 हॉर्स पावर के इलेक्ट्रिक इंजन, भारतीय रेलवे के विद्युतीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी और हमें सीमेंस मोबिलिटी की नवीनतम तकनीक का इस्तेमाल करके भारत में इनका निर्माण करने पर गर्व है।"

बानन में कहा गया है, "इंजनों को गुजरात के दाहोद में स्थित भारतीय रेलवे की फैक्ट्री में असेंबल किया जाएगा। कॉन्ट्रैक्ट की कुल वैल्यू लगभग 26,000 करोड़ रुपये है और इसमें टैक्स और प्राइस वेरिएशन शामिल नहीं है।"


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इन इंजनों का मेंटीनेंस भारतीय रेलवे के विशाखापत्तनम, रायपुर, खड़गपुर और पुणे स्थित डिपो में किया जाएगा। इनकी असेंबली और मेंटीनेंस का काम इंडियन रेलवे के कर्मचारियों के साथ मिलकर किया जाएगा।

इन आधुनिक रेल इंजनों का इस्तेमाल माल ढुलाई में किया जाएगा और इन्हें 4,500 टन के वजन के साथ 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने के लिए तैयार किया जाएगा।

सीमेंस के सीईओ रॉलैंड बुश्च ने कहा, "हमें गर्व है कि यह बड़ा ऑर्डर भारत को दुनिया का सबसे बड़ा ग्रीन रेलवे नेटवर्क बनाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा। हमारे रेल इंजन अपने पूरे जीवन चक्र में करीब 80 करोड़ टन से अधिक कॉर्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन की बचत करेंगे।"

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