स्टार्टअप की दुनिया में भारतपे (BharatPe) जाना माना नाम है। को-फाउंडर अश्नीर ग्रोवर (Ashneer Grover) के कंपनी से बाहर निकलने के बाद से यह लगातार चर्चा में बना हुआ है। कुछ दिन पहले इसके सीईओ सुहैल समीर (Suhail Sameer) ने इस्तीफा दिया और अब भारतपे (BharatPe) का घाटा चर्चा में है। इसे वित्त वर्ष 2021-22 में 5594 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ जिसने चौंकाया है। हालांकि कंपनी का कहना है कि भारी-भरकम घाटा अकाउंटिंग के एक नियम के चलते है। वित्त वर्ष 2022 में कंपनी का रेवेन्यू 169 फीसदी बढ़कर 321 करोड़ रुपये रहा। हालांकि घाटा सालाना आधार पर 2961 करोड़ रुपये से 89 फीसदी बढ़कर 5594 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
क्या है अकाउंटिंग का वह नियम, जिसने बढ़ाया घाटा
कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी नलिन नेगी के मुताबिक भारतपे को जो भारी-भरकम घाटा बैलेंस शीट में दिख है, वह कंपल्सरिली कंवर्टिबल प्रिफरेंस शेयर (CCPS) के चलते है। स्टार्टअप को आमतौर पर ऐसा निवेश मिलता है जिसमें रीपेमेंट या बायबैक जैसी शर्तें जुड़ी होती हैं। इसके अलावा आईपीओ की स्थिति इसे कॉमन स्टॉक या स्टैंडर्ड इक्विटी शेयरों में भी बदला जा सकता है। अब यहां भारतपे के मामले में दिक्कत ये हुई कि भारतीय अकाउंटिंग के नियमों के मुताबिक सीसीपीएस के फेयर वैल्यूएशन में किसी भी बदलाव को देनदारी के तौर पर लिया जाएगा।
जैसे कि कि अगर एक कंपनी की वैल्यू किसी वित्त वर्ष में 100 करोड़ डॉलर से बढ़कर 300 करोड़ डॉलर हो जाती है और सीसीपीएस की वैल्यू 1 हजार डॉलर से बढ़कर 3 हजार डॉलर होती है तो अकाउंटिंग के नियमों के मुताबिक सीसीपीएस की बढ़ी हुई वैल्यू यानी 2 हजार डॉलर देनदारी में होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि बायबैक राइट की वैल्यू बढ़ जाएगी।
BharatPe के घाटे में सीसीपीएस की कितनी हिस्सेदारी
कई बड़े स्टार्टअप्स घाटे से बचने के लिए सीसीपीएस के प्रावधानों में बायबैक राइट्स को जोड़ने से इनकार करते हैं। अगस्त 2021 में भारतपे ने सीसीपीएस के क्लॉज में बदलाव कर बायबैक राइट्स हटा दिया था और उस समय इस कंपनी की कमान अश्नीर ग्रोवर के हाथ में थी। हालांकि इससे पहले सीसीपीएस में यह था तो वित्त वर्ष 2022 में फिनटेक कंपनी भारतपे को जो 5594 करोड़ रुपये का घाटा है, उसमें सीसीपीएस के फेयर वैल्यू में बदलाव की हिस्सेदारी 4782 करोड़ रुपये है।
हालांकि कंपनी के सीएफओ के मुताबिक अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि सीसीपीएस को लाएबिलिटी से इक्विटी में बदला जाएगा। कंपनी ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि इसे नए बिजनेस सेग्मेंट्स स्वाइप और पोस्टपे के लिए निवेश चाहिए। अगर सीसीपीएस वाली लाएबिलिटी को हटा दिया जाए तो वित्त वर्ष 2021 में भारतपे को 277 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2022 में 811 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।