एडटेक फर्म बायजूज (Byju’s) ने बुधवार 29 दिसंबर को दावा किया कि उसे प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जो नोटिस मिला है, उसका किसी वित्तीय गड़बड़ी से कोई लेनादेना नहीं है। कंपनी ने कहा कि यह नोटिस सिर्फ तकनीकी कारणों तक सीमित है, जिसमें सालाना रिपोर्ट को देर से जमा करना आदि शामिल है और इसका फॉरेन एक्सचेंज नियमों (FEMA) के उल्लंघन जैसे किसी भी वित्तीय गड़बड़ी से कोई वास्ता नहीं है। यह बयान ED की ओर से इस पुष्टि के बाद आया है कि उसने बायजूज की पैरेंट कंपनी 'थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड' और फाउंडर बायजू रवींद्रन (Byju Raveendran) को FEMA के उल्लंघन से जुड़े मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
Byju's ने बयान में इस बात पर जोर दिया कि जांच एजेंसी ने अपने नोटिस में 'तकनीकी' सवालों के लिए किसी भी पेनाल्टी का दावा नहीं किया है, और जो भी जुर्माना लगेगा वह कुछ हजार रुपये तक हो सकता है।
कंपनी ने कहा, “अथॉरिटी की पूर्व कार्रवाइयों के आधार पर, हम अनुमान लगाते हैं कि जुर्माना, अगर कोई लगता है तो, नाममात्र होगा। अगर इसका एक उदाहरण दें तो, रिपोर्ट जमा करने में ऐसी देरी के लिए़ RBI के नियमों के तहत एक लेट सबमिशन फीस लगाया जाता है, जो बहुत मामूली (7,500 रुपये) है।"
यहां बताना जरूरी है कि बायजूज ने कुछ दिनों पहले ही ED से किसी भी तरह की नोटिस मिलने की बात से इनकार किया था, लेकिन आज के बयान से इसे नोटिट मिलने की पुष्टि होती है। कंपनी ने कहा, "हमें प्रवर्तन निदेशालय से नोटिस मिला है, जिसने अब निश्चित रूप से अपनी जांच पूरी कर ली है।"
Byju’s ने यह भी कहा कि ED की ओर से एफडीआई नियमों के उल्लंघन का कोई मामला नहीं बनाया गया है। बयान में कहा गया है, "कंपनी को सलाह दी गई है कि एपीआर दाखिल करने में देरी (खासतौर जब FDI मिलने के संबंध में रिटर्न समय पर दाखिल किया गया हो) एक तकनीकी मुद्दा है और कंपनी इस मामले से सफलतापूर्वक निपटने को लेकर आश्वस्त है।"
इससे पहले ED ने 21 नवंबर को एक बयान में कहा था कि बायजू और उसके फाउंडर रवींद्रन के खिलाफ फॉरने एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के प्रावधानों के तहत 9,362.35 करोड़ रुपये के उल्लंघन के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
ED का कहना है कि बायूज देश के बाहर भेजे गए एडवांस राशि के बदले इंपोर्ट के दस्तावेज जमा करने में ‘नाकाम’ रही है। इसके अलावा एजेंसी ने कंपनी को मिले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के मुकाबले एक्सपोर्ट से हुई आय का ब्योरा देने में देरी का आरोप भी लगाया।