मीट डिलीवरी करने वाली स्टार्टअप लिशियस (Licious) ने सालाना 100 मिलियन डॉलर के रेवेन्यू रन रेट के आंकड़े को पार कर गया है। भारतीय रुपये में 100 मिलियन डॉलर करीब 850 करोड़ रुपये होंगे। Licious के फाउंडर विवेक गुप्ता और अभय हंजुरा ने मनीकंट्रोल को एक इंटरव्यू में यह जानकारी दी। सालाना 850 करोड़ के रेवेन्यू के हिसाब से, कंपनी की मंथली रेवेन्यू 70 से 72 करोड़ रुपये के करीब आता है, जो एक साल पहले दर्ज किए गए 60 करोड़ रुपये से लगभग 18 प्रतिशत अधिक है।
सालाना रेवेन्यू रन रेट का एक आंकड़ा होता है, जिसे मौजूदा मंथली रेवेन्यू को 12 महीने से गुणा करके निकाला जाता है। यह गणना यह मानकर की जाती है कि कंपनी आने वाले महीनों में भी इसी रफ्तार से ग्रोथ करेगी।
इससे कई महीने मनीकंट्रोल ने एक रिपोर्ट में बताया था कि लिशियस का वित्त वर्ष 2024 के पहले कुछ महीनों के दौरान मंथली रेवेन्यू 62-68 करोड़ रुपये के बीच स्थिर रहा है। इससे पहले वित्त वर्ष 2022 में कंपनी का रेवेन्यू 64 प्रतिशत बढ़कर 706 करोड़ रुपये रहा था, जो वित्त वर्ष 2021 में 430 करोड़ रुपये था।
हालांकि लिशियस आगे यही रफ्तार बरकरार नहीं रख पाई और वित्त वर्ष 2023 में उसका रेवेन्यू 746 करोड़ रुपये रहा था, जो शुरुआत में लगाए गए 1,500 करोड़ रुपये के अनुमान से आधे से भी कम था। कंपनी का कहना है कि इसका मुख्य कारण कोरोना महामारी के बाद आई मंदी थी।
यहां ये बताना जरूरी है कि 850 करोड़ रुपये, लिशियस का सालाना रेवेन्यू रन रेट है और यह वित्त वर्ष 2024 के फाइनल रेवेन्यू का आंकड़ा नहीं है। लिशियस अभी भी FY24 के लिए अपने नतीजों को बंद करने की प्रक्रिया में है।
गुप्ता और हंजुरा ने हालांकि कहा कि लोअर वेस्टेज (सालाना आधार पर 6 प्रतिशत से घटकर 3.5 प्रतिशत), लाभदायक इकाइयों पर फोकस बढ़ने और लागत पर बेहतर नियंत्रण के कारण वित्त वर्ष 2024 में कंपनी के स्केल में सुधार हुआ है। लगभग 18 महीनों में कंपनी का ग्रॉस मार्जिन 5 प्रतिशत से बढ़कर 30 प्रतिशत हो गया है।
बेंगलुरु मुख्यालय वाली कंपनी ने बताया कि उसका मंथली कैश बर्न करीब 12 करोड़ रुपये है। मनीकंट्रोल ने पिछले रिपोर्ट में बताया थि कि लिशियस को हर महीने करीब 22-26 करोड़ रुपये कैश बर्न कर रही थ। बेहतर यूटिलाइजेशन (51 प्रतिशत से बढ़कर 78 प्रतिशत) और छंटनी जैसे कुछ कारणों से, कंपनी को अपनी लागत कम करने में मदद मिली।