पिछले 18 महीने से फंडिंग का सूखा अब खत्म हो सकता है। टेक्नोलॉजी सेक्टर में भारी-भरकम निवेश डालने वाला सॉफ्टबैंक (SoftBank) अब एक बार फिर से भारतीय स्टार्टअप में निवेश को तैयार है। जापानीज निवेशक आने वाले महीने में एक बार फिर से डील साइन करना शुरू करेगा। यह जानकारी मनीकंट्रोल के साथ इंटरव्यू में सॉफ्टबैंक इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स के प्रमुख (भारत, यूरोप, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका) सुमेर जुनेजा ने दी। सुमेर ने यह टिप्पणी ऐेसे समय में की है जब अधिकतर निवेशकों ने जिन कंपनियों में पैसे डाले हैं, उसे लेकर अधिक सोच-विचार करने लगे हैं। टाइगर ग्लोबल, प्रोसुस और अल्फा जैसे लेट-स्टेज इनवेस्टर भी निवेश से कतरा रहे हैं। सॉफ्टबैंक भी इसी वेट एंड वॉच मोड में रहा है लेकिन अब यह नए दौर की कंपनियों में निवेश और भारत में अपना पोर्टफोलियो तैयार करने की योजना बना रहा है।
'पिछले दो वर्षों से अलग होगा यह साल 2024'
वर्ष 2022 और वर्ष 2023 की शुरुआत में सभी निवेशक, खासतौर से शुरुआती स्टेज के निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो पर ध्यान देना शुरू किया कि फंडिंग विंटर में भी यह मजबूत बना रहे। उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उनका पोर्टफोलियो भारी-भरकम था। इसके चलते सौदों की संख्या में गिरावट आई। हालांकि 2023 की दूसरी छमाही में स्थिति बदली और सीड और सीरीज ए/बी डील्स ने स्पीड पकड़ी। सुमेर जुमेजा के मुताबिक अब इस साल स्थिति बदलने वाली है क्योंकि फाउंडर्स अब नए वैल्यूशन के साथ आ रहे हैं और बाजार की संभावनाओं को भुनाने के लिए वे फिर से इसकी वैल्यू तय करने को भी तैयार हैं। सुमेर के मुताबिक फाउंडर्स ने लागत कम करने के लिए में काफी उपाय किए हैं जिसने माहौल बेहतर किया है।
अब बात है कि कितना निवेश सॉफ्टबैंक करेगा तो सुमेर के मुताबिक अब कंपनियों के पास पूंजी बढ़ गई है तो उन्हें फंड की जरूरत कम पड़ेगी। सुमेर का कहना है कि भारत में माहौल काफी उत्साहजनक है और सॉफ्टबैंक किनारे नहीं रहेगा। कम से कम 5 करोड़ डॉलर का निवेश मिलेगा। उन्होंने आगे कहा कि निवेशक के तौर पर सबसे बड़ी गलती अपने तरीके में बदलाव है और सॉफ्टबैंक यह गलती नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि सॉफ्टबैंक सीड या सीरीज ए निवेशक नहीं है और सॉफ्टबैंक यह बनने की कोशिश भी नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि सॉफ्टबैंक का पाइपलाइन कम हो सकता है लेकिन क्वालिटी और जांच-पड़ताल से पीछे नहीं हटा जाएगा।
सुमेर ने कहा कि सॉफ्टबैंक ने डेल्हीवरी, लेंसकार्ट और पॉलिसीबाजार, मीशो, माइंडटिकल, व्हाटफिक्स, ऑफबिजनेस समेत कई कंपनियों में ऐसे समय में पैसे डाले, जब लिक्विडिटी सीमित थी और तब इन कंपनियों को कैपिटल एफिशिएंसी के फोकस के साथ शुरू किया गया था। उनका कहना है कि सबसे अच्छे आंत्रप्रेन्योर तब सामने आते हैं जब लिक्विडिटी सीमित होती है और हाई क्वालिटी वाले फाउंडर्स को फंड दिया जाता है।
भारत में अभी कितना है दांव
सॉफ्टबैंक इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स ने नवंबर 2018 से अपना ऑपरेशन शुरू किया था और उसके बाद से इसने भारतीय स्टार्टअप में करीब 1100 करोड़ रुपये डाले हैं। इसमें से यह 620 करोड़-650 करोड़ डॉलर निकाल भी चुकी है। कंपनी ने जोमैटो और पीबी फिनटेक में ब्लॉक डील के जरिए पिछले साल अपनी हिस्सेदारी बेची थी। उन्होंने कहा कि कंपनियों के परफॉरमेंस और मार्केट की मजबूती के हिसाब से सॉफ्टबैंक मौके को भुनाते हुए अपने पैसे निकालेगी। सॉफ्टबैंक के पोर्टफोलियो की चार कंपनियां- जोमैटो, पीबी फिनटेक, पेटीएम और डेल्हीवरी मार्केट में लिस्टेड हैं और अब यह स्विगी, फर्स्टक्राई और ओला इलेक्ट्रिक जैसी और भी कंपनियों को लिस्ट करने के लिए तैयार कर रही है।