Steel Prices: पिछले 6 महीने में 40% गिरी स्टील की कीमतें, 57,000 रुपये प्रति टन तक आ गया भाव

Steel Prices: एक रिपोर्ट के मुताबिक स्टील के एक्सपोर्ट पर 15 फीसदी ड्यूटी लगाने से इसके निर्यात में कमी आई है और इसका असर घरेलू बाजार में इसकी कीमतों पर पड़ा है

अपडेटेड Oct 20, 2022 पर 5:23 PM
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स्टील की कीमतें इस साल अप्रैल महीने से गिरनी शुरू हुई हैं

देश में पिछले 6 महीने के दौरान स्टील की कीमतों (Steel prices) में करीब 40 फीसदी की गिरावट आई है। स्टील का भाव अब 57,000 रुपये प्रति टन पर आ गया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई ने ऑयरल और स्टील इंडस्ट्री से जुड़ी जानकारी देने वाली कंपनी स्टीलमिंट के हवाले से बताया कि 15 फीसदी एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाने से स्टील का एक्सपोर्ट घट गया है, जिससे कीमतों में यह गिरावट आई है।

रिपोर्ट के मुताबिक इस साल की शुरुआत में हॉट रोल्ड कॉइल (HRC) की कीमतों में बढ़ोतरी दिखना शुरू हो गई थी। HRC की बढ़ती कीमतें इसका इस्तेमाल करने वाली विभिन्न इंडस्ट्रियों के लिए चिंता का विषय था। दरअसल स्टील की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन, ऑटो और कंज्यूमर गुड्स जैसे इंडस्ट्रियों पर पड़ता है।

स्टीलमिंट के अनुसार, घरेलू बाजार में स्टील की कीमतें अप्रैल, 2022 में 78,800 रुपये प्रति टन पर पहुंच गई थी। वहीं 18 प्रतिशत GST के बाद कीमत लगभग 93,000 रुपये प्रति टन हो गई थी।


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रिसर्च कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, कीमतें अप्रैल के अंत से गिरनी शुरू हुई और जून के अंत तक घटकर 60,200 रुपये प्रति टन पर आ गई। जुलाई और अगस्त में भी कीमतों में गिरावट जारी रही और सितंबर के मध्य तक यह घटकर 57,000 रुपये प्रति टन पर आ गई। हालांकि सभी कीमतों में 18 फीसदी GST शामिल नहीं है।

स्टीलमिंट ने स्टील उत्पादों पर सरकार की तरफ से लगाए टैक्स, विदेशों से मांग में कमी, महंगाई की ऊंची दर और ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी को स्टील की कीमतों में गिरावट के पीछे मुख्य कारण बताया है।

स्टील की कीमतें आग किसी दिशा में जाएंगी, इस पर कंपनी ने कहा कि HRC की कीमतें अगली तिमाही में सीमित दायरे में बनी रहेंगी। चूंकि आगे भी स्टील का एक्सपोर्ट सामान्य से कम रहने और इन्वेंट्री दबाव बने रहने की भी संभावना है। ऐसे में मिलों के अगले दो महीनों में कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना नहीं है।

सरकार ने 21 मई को आयरन ओर के एक्सपोर्ट पर 50 फीसदी तक और कुछ स्टील इंटरमीडिएरीज पर 15 फीसदी तक ड्यूटी बढ़ा दिया था। इस कदम का उद्देश्य घरेलू निर्माताओं के लिए इन कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाना था।

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