टाटा ग्रुप ने लिथियम ऑयन बैटरी बनाने के लिए गुजरात में 13,000 करोड़ रुपये के निवेश से एक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने का फैसला किया है। ग्रुप ने इसके लिए गुजरात सरकार के साथ एक मेमोरंडम ऑफ एसोसिएशन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। हमारे सहयोगी न्यूज चैनल CNBC-TV18 ने शुक्रवार 2 जून को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। रिपोर्ट के मुताबिक प्लांट की शुरुआत उत्पादन क्षमता 20 गीगावॉट घंटे की होगी। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ( Bhupendra Patel) की उपस्थिति में गुजरात सरकार और टाटा ग्रुप की सहायक कंपनी अगरतस एनर्जी स्टोरेज सॉल्यूशन (Agartas Energy Storage Solution) के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
इस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का उद्देश्य देश में लिथियम-आयन बैटरी की बढ़ती मांग को पूरा करना है। कंपनी ने यह घोषणा ऐसे समय में की है जब सरकार देशभर में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने पर जोर दे रही है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने उम्मीद जताई कि इस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट से राज्य में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होंगे। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि यह प्रोजेक्ट के जरिए राज्य में लिथियम-आयन बैटरी बनाने के ईकोसिस्टम को तैयार करने में मदद करेगा।
भूपेंद्र पटेल ने गुजराती में ट्वीट करते हुए, "गुजरात में देश की पहली लीथियम-आयन सेल की मैन्युफैक्चरिंग गीगा फैक्ट्री लगाने के लिए आज राज्य सरकार और टाटा समूह के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौते राज्य की नई इलेक्ट्रॉनिक्स पॉलिसी का नतीजा है। समझौते के तहत पहले चरण में 3,000 करोड़ रुपये के निवेश से 20 गीगावॉट का प्लांट लगाया जाएगा। इससे बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होंगे।"
उन्होंने आगे कहा, "गुजरात सरकार र इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन को बढ़ाकर कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। EV वाहनों का इस्तेमाल बढ़ने से लिथियम-आयन बैटरी की मांग भी काफी बढ़ जाएगी। यह प्रोजेक्ट परियोजना राज्य में लिथियम-आयन सेल बनाने के ईकोसिस्टम को तैयार करने में मदद करेगा।"