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Airtel को बंद हो चुकी Aircel को चुकाने होंगे ₹112 करोड़, सुप्रीम कोर्ट का आदेश; क्या है मामला

साल 2016 में एयरटेल ने एयरसेल लिमिटेड और इसकी सहायक कंपनी डिशनेट वायरलेस के साथ 8 स्पेक्ट्रम ट्रेडिंग एग्रीमेंट किए थे। ये समझौते एयरसेल को 2300 मेगाहर्ट्ज बैंड में मिले स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल करने के अधिकार की खरीद के लिए थे। 2018 में जब एयरसेल CIRP में गई तो एयरटेल पर उसका, STA से जुड़ा और अन्य बकाए समेत 453 करोड़ रुपये का अमाउंट बकाया था

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Jan 04, 2024 पर 4:08 PM
Airtel को बंद हो चुकी Aircel को चुकाने होंगे ₹112 करोड़, सुप्रीम कोर्ट का आदेश; क्या है मामला
3 जनवरी को कोर्ट ने NCLAT के आदेश के खिलाफ एयरटेल की याचिका को खारिज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने टेलिकॉम कंपनी भारती एयरटेल (Bharti Airtel) को ऑपरेशंस बंद कर चुकी एयरसेल (Aircel) को 112 करोड़ रुपये चुकाने का निर्देश दिया है। यह भुगतान, दोनों कंपनियों के बीच स्पेक्ट्रम ट्रेड एग्रीमेंट्स (STA) और अन्य बकाए को लेकर करने को कहा गया है। साल 2016 में एयरटेल ने एयरसेल लिमिटेड और इसकी सहायक कंपनी डिशनेट वायरलेस के साथ 8 स्पेक्ट्रम ट्रेडिंग एग्रीमेंट किए थे। ये समझौते एयरसेल को 2300 मेगाहर्ट्ज बैंड में मिले स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल करने के अधिकार की खरीद के लिए थे। हालांकि 2018 में एयरसेल इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC), 2016 के तहत कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में चली गई, यानि दिवालिया हो गई।

जब एयरसेल CIRP में गई तो एयरटेल पर उसका, STA से जुड़ा और अन्य बकाए समेत 453 करोड़ रुपये का अमाउंट बकाया था। 2019 में एयरसेल के रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आरपी) ने भुगतान करने के लिए एयरटेल को बुलाया था। लेकिन एयरटेल ने केवल 341 करोड़ रुपये का भुगतान किया और 112 करोड़ रुपये को नहीं चुकाया। कंपनी ने तर्क दिया कि यह अन्य लेनदेन के कारण एयरसेल पर बकाया है।

फिर NCLT में पहुंचा मामला

इसके बाद आरपी ने एयरटेल को लिखा कि वह शेष 112 करोड़ रुपये का भुगतान करे। साथ ही यह भी कहा कि अगर कंपनी की ओर से ऐसा नहीं किया जाता है तो आरपी आगे कदम उठाएगा। आरपी का कहना था कि एयरटेल इस बकाए को सेट ऑफ नहीं कर सकती क्योंकि IBC में इसकी इजाजत नहीं है। इसके बाद एयरटेल इस मामले को नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) में लेकर गई। NCLT ने एयरटेल को 112 करोड़ रुपये सेट ऑफ करने की इजाजत दे दी। इसके बाद 2019 में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्राइब्यूनल (NCLAT) में NCLT के आदेश के खिलाफ एक अपील दायर की गई।

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