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क्रेडिट कार्ड पर इंटरेस्ट कैसे लगता है? इंटरेस्ट रेट और मिनिमम पेमेंट का गणित आसान उदाहरणों से समझें

क्रेडिट कार्ड आपकी जरूरतों को आसान बनाने के साथ-साथ बेहतर क्रेडिट हिस्ट्री बनाने में भी मदद करते हैं. लेकिन अगर समय पर बिल पेमेंट न किया जाए, तो हाई इंटरेस्ट रेट और लेट फीस आपके खर्च को बढ़ा सकते हैं. इसलिए क्रेडिट कार्ड का समझदारी से इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है.

MoneyControl Newsअपडेटेड May 23, 2026 पर 4:02 PM
क्रेडिट कार्ड पर इंटरेस्ट कैसे लगता है? इंटरेस्ट रेट और मिनिमम पेमेंट का गणित आसान उदाहरणों से समझें

क्रेडिट कार्ड एक ऐसा फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट है, जिसकी मदद से आप संबंधित बैंक से पैसे उधार लेकर खरीदारी कर सकते हैं और बाद में चुका सकते हैं. अगर आप तय समय पर यह आउटस्टैंडिंग या बकाया नहीं चुकाते हैं, तो बैंक उस पर इंटरेस्ट (ब्याज) लेता है. क्रेडिट कार्ड न सिर्फ आपकी क्रेडिट हिस्ट्री बनाने में मदद करते हैं, बल्कि रिवॉर्ड कमाने और जरूरी खर्चों को मैनेज करने की भी सुविधा देते हैं. चाहे घर किराया हो, बिजली-पानी का बिल, मोबाइल रिचार्ज या फिर शॉपिंग, क्रेडिट कार्ड से लगभग हर खर्च मैनेज हो सकता है. 

हालांकि, इस सुविधा के साथ कुछ शर्तें भी जुड़ी होती हैं, जैसे मिनिमम पेमेंट, इंटरेस्ट चार्ज, लेट फीस और बाकी हिडेन चार्ज. अगर जिम्मेदारी से इस्तेमाल न किया जाए, तो क्रेडिट कार्ड आपको आसानी से कर्ज के जाल में फंसा सकते हैं.

क्रेडिट कार्ड पर इंटरेस्ट रेट

हर क्रेडिट कार्ड पर इंटरेस्ट रेट से जुड़ी कुछ शर्तें होती हैं; यानी जो अमाउंट आप बैंक से उधार लेते हैं, उस पर एक तय फीसदी चार्ज किया जाता है. क्रेडिट कार्ड पर लगने वाले इंटरेस्ट रेट को एनुअल परसेंटेज रेट (APR) कहा जाता है. अगर आप किसी महीने पूरा बिल नहीं चुकाते हैं, तो अनपेड या आउटस्टैंडिंग बैलेंस पर यह एनुअल इंटरेस्ट रेट लागू होता है. क्रेडिट कार्ड का APR आमतौर पर  24% से 40% तक होता है. कुछ कार्ड इश्यूअर 48-50% तक भी APR वसूलते हैं. ध्यान रहे कि यह इंटरेस्ट असल में डेली बेसिस पर कैलकुलेट किया जाता है.

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