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National Quantum Mission को कैबिनेट की मंजूरी, जानिए क्या है यह मिशन

क्वांटम मेकानिक्स के सिद्धांतों का इस्तेमाल सेमीकंडक्टर्स, लेजर्स, ब्लू-रे, ट्रांजिस्टर्स, मोबाइल फोन, यूएसबी ड्राइव, एमआरआई, इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप्स और यहां तक कि बेसिक लाइट स्विच तक में होता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 20, 2023 पर 2:57 PM
National Quantum Mission को कैबिनेट की मंजूरी, जानिए क्या है यह मिशन
इंडिया में क्वांटम मिशन की शुरुआत 2018 में हो गई थी। तब डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में ने क्वांटम कंप्यूटिंग से जुड़े एक प्रोजेक्ट का प्रस्ताव पेश किया था।

यूनियन कैबिनेट में नेशनल क्वांटम मिशन (NQM) को मंजूरी दे दी है। यह मिशन 6,003.65 करोड़ रुपये का है। इस मिशन के तहत क्वांटम टेक्नोलॉजी से जुड़े रिसर्च और डेवलपमेंट पर फोकस होगा। इस मिशन के तहत कई टारगेट होंगे, जिन्हें अगले 8 साल में हासिल हो जाने की उम्मीद है। क्वांटम टेक्नोलॉजी फिजिक्स और इंजीनियरिंग से जुड़ा एक फील्ड है। इसमें क्वांटम मेकानिक्स के सिद्धांत के इस्तेमाल से नई टेक्नोलॉजी विकसित की जाती है। क्वांटम मेकानिक्स फिजिक्स का एक ब्रांच है। इसमें बहुत सूक्षम स्तर पर मैटर और एनर्जी के विहेबियर का एनालिसिस होता है।

क्वांटम थ्योरी का इस्तेमाल

क्वांटम मेकानिक्स के सिद्धांतों का इस्तेमाल सेमीकंडक्टर्स, लेजर्स, ब्लू-रे, ट्रांजिस्टर्स, मोबाइल फोन, यूएसबी ड्राइव, एमआरआई, इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप्स और यहां तक कि बेसिक लाइट स्विच तक में होता है। क्लासिकल कंप्यूटर्स ट्रांजिस्टर आधारित होते है। लेकिन, क्वांटम कंप्यूटर्स एटम्स पर काम करेंगे। इनमें कैलकुलेशन के लिए क्लासिकिल बिट्स की जगह क्वांटम बिट्स का इस्तेमाल होते हैं। क्वांटम कंप्यूटिंग का एक फायदा यह है कि इससे प्रॉब्लम को बहुत जल्द सॉल्व किया जा सकता है।

कुब शुरु हुआ था मिशन

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