Exclusive: वीडियोकॉन लोन घोटाला मामला: वेणुगोपाल धूत ने अपने ही ऑफिस में की थी 'न्यूपॉवर' कंपनी की स्थापना

वीडियोकॉन (Videocon) और आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) से जुड़े 3,250 करोड़ रुपये के लोन घोटाला मामले के केंद्र में 'न्यूपॉवर (Nupower)' नाम की एक कंपनी है, जो चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की कंपनी है। अब इस कंपनी को लेकर कुछ नई जानकारी सामने आई है

अपडेटेड Jan 25, 2023 पर 7:37 PM
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वीडियोकॉन के वेणुगोपाल धूत को सीबीआई ने बैंक फ्रॉड मामले में गिरफ्तार किया था, बाद में उन्हें जमानत मिल गई (फाइल फोटो)

वीडियोकॉन (Videocon) और आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) से जुड़े 3,250 करोड़ रुपये के लोन घोटाला मामले में नई जानकारी सामने आई है। ये नई जानकारी बताती है कि वीडियोकॉन ग्रुप के मालिक वेणुगोपात धूत और ICICI बैंक की पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर चंदा कोचर का परिवार घोटाले के पहले से एक दूसरे से जुड़े रहे हैं। इस घोटाले के केंद्र में 'न्यूपॉवर (Nupower)' नाम की एक कंपनी है, जो चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की कंपनी है। नई जानकारी बताती है कि 'न्यूपॉवर (Nupower)' की स्थापना और कामकाज जिस ऑफिस पते से शुरू हुआ था, ठीक वही पता वेणुगोपात के स्वामित्व वाली एक कंपनी 'सुप्रीम एनर्जी' का भी है। ये इन दोंनों के बीच पहले से कारोबारी रिश्ते होने का संकेत करता है।

न्यूपॉवर रिन्यूएबल्स और सुप्रीम एनर्जी को महाराष्ट्र के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज की ओर से जारी सर्टिफिकेट में, दोनों कंपनियों के लिए एक ही पता को दिखाया गया है और वो पता है- फोर्ट हाउस, सेकेंड फ्लोर, 221 डॉक्टर डीएन रोड, मुंबई। मनीकंट्रोल ने इन सर्टिफिकेट की एक कॉपी देखी है।

वीडियोकॉन ग्रुप के चेयरमैन धूत ने की मौकों पर कोचर परिवार के साथ रिश्तों और किसी भी तरह के गलत कार्य करने से इनकार किया है। वहीं कोचर परिवार ने कथित लोन घोटाला मामले में किसी तरह का गलत करने से इनकार किया है।


कोचर परिवार पर आरोप है कि उसने वीडियोकॉन ग्रुप को ICICI बैंक से लोन मंजूर करवाने के बदले में अपनी कंपनी में निवेश लिया था। वीडियोकॉन को जब ICICI बैंक ने लोन मंजूर किया था, तब चंदा कोचर उसकी मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ थीं।

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वही पता, वही मालिक

डॉक्यूमेंट के मुताबिक, सुप्रीम एनर्जी का गठन 26 जून 2008 को हुआ था। इसके करीब 6 महीने बाद 18 दिसंबर 2008 को न्यूपॉवर की स्थापना की गई। सुप्रीम एनर्जी के लिए हस्ताक्षरकर्ता वेणुगोपाल धूत और उनके सहयोगी वसंत काकड़े थे। धूत की इस कंपनी में 99.9 फीसदी हिस्सेदारी है।

वहीं NuPower की स्थापना कोचर और धूत परिवार के बीच बराबर साझेदारी में हुई थी। न्यूपॉवर के मेमोरंडम ऑफ एसोसिएशन और आर्टिकल ऑफ एसोसिशएन के मुताबिक, इस कंपनी के हस्ताक्षरकर्ताओं में सात लोग शामिल थे। इसमें वेणुगोपाल धूत, सौरभ धूत (वेणुगोपाल के भाई प्रदीप कुमार धूत के बेटे), राजकुमार धूत (वेणुगोपाल के भाई), महेश चंद्र पुंगलिया (वीडियोकॉन के पूर्व कर्मचारी), दीपक कोचर (चंदा कोचर के पति), सुरेश हेगड़े (वीडियोकॉन के पूर्व फाइनेंस डायरेक्टर और पैसिफिक कैपिटल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड शामिल था। धूत को कंपनी के पहले शेयरहोल्डर के रूप में सूचीबद्ध किया गया था।

पैसिफिक कैपिटल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड

मनीकंट्रोल ने 28 दिसंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया था कि इस कंपनी की स्थापना 1999 में हुई थी और कोचर परिवार के सदस्य इसके शेयरधारक थे।

15 नवंबर 1999 के मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन के अनुसार, पैसिफिक कैपिटल की स्थापना एक इनवेस्टमेंट कंपनी के तौर पर हुई थी, जिसके दो शेयरधारक थे- 15 नवंबर 1999 के मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन के अनुसार, पैसिफिक कैपिटल। दोनों का कंपनी में बराबर शेयर था। वीरेंद्र कुमार कोचर और विनोदिनी कोचर, दीपक कोचर के माता-पिता हैं।

संक्षेप में, कहें तो कोचर परिवार अपनी एक फैमिली होल्डिंग कंपनी और दीपक कोचर की प्रत्यक्ष शेयरहोल्डिंग के जरिए नूपॉवर को कंट्रोल करता था। वहीं कंपनी की बाकी आधी हिस्सेदारी को धूत परिवार अपने 3 सदस्यों (वेणुगोपाल, राजकुमार और सौरभ) और कंपनी के दो पूर्व कर्मचारियों के जरिए नियंत्रित करता था।

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लोन के बदले गलत लाभ लिए

साल 2009 में धूत ने सुप्रीम एनर्जी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर से इस्तीफा दे दिया और अपनी हिस्सेदारी दीपक कोचर के स्वामित्व वाली कंपनी पिनाकल एनर्जी को ट्रांसफर कर दी। मार्च 2010 में धूत ने सुप्रीम एनर्जी के जरिए न्यूपॉवर में 64 करोड़ रुपये का निवेश किया।

तो इसका क्या मतलब हुआ?

आसान शब्दों में कहें तो वेणुगोपाल ने अपने ही ऑफिस के पते पर न्यूपॉवर की स्थापना की। फिर ICICI बैंक से वीडियोकॉन ग्रुप को 3,250 करोड़ का लोन मिलने के बाद न्यूपॉवर का मालिकाना हक चंदा कोचर के पति को ट्रांसफर कर दिया।

कंपनी के गठन का समय

नूपॉवर रिन्यूएबल्स और सुप्रीम एनर्जी के गठन के करीब चार साल बाद वीडियोकॉन ग्रुप की कंपनियों ICICI बैंक से लोन मिला था। जिन कंपनियों को लोन मिला, उनमें ट्रेंड इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, सेंचुरी एप्लायंसेज लिमिटेड, कैल लिमिटेड, वैल्यू इंडस्ट्रीज लिमिटेड, इवांस फ्रेजर एंड कंपनी इंडिया लिमिटेड शामिल हैं।

इस मामले के शिकायकर्ता अरविंद गुप्ता की ओर से अधिकारियों को भेजे गए लेटर के मुताबिक, इन सभी पांचों को कंपनियों को 30 अप्रैल, 2012 को लोन मंजूर किए थे और सभी लोन की राशि 650 करोड़ रुपये थी, जो कुल मिलाकर 3,250 करोड़ रुपये आती है। बाद में इन लोन को एक कंसोर्टियम लोन में बदल दिया गया।

कर्ज में डूबे और वित्तीय संकट से जूझ रहे वीडियोकॉन ग्रुप के लिए ICICI बैंक से 3,250 करोड़ रुपये का यह लोन एक बड़ी राहत था।

CBI कर रही मामले की जांच

सीबीआई ने आरोप लगाया है कि चंदा कोचर ने आईसीआईसीआई बैंक के अन्य सीनियर अधिकारियों के साथ इन लोन को मंजूरी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जांच में पाया गया कि कोचर को नूपॉवर रिन्यूएबल्स के बारे में पता था, लेकिन फिर भी उन्होंने वीडियोकॉन क्रेडिट कमेटी का हिस्सा बनना चुना। CBI ने कोचर पर धोखाधड़ी और आधिकारिक पद के दुरुपयोग का आरोप लगाया है।

लोन मंजूर किए जाने के बाद वीडियोकॉन बॉस ने फर्म में 64 करोड़ रुपये डाले और अंत में अपनी पूरी हिस्सेदारी दीपक कोचर के परिवार को ट्रांसफर कर दी, जैसा कि ऊपर बताया गया है। CBI ने इस मामले में चंदा कोचर, दीपक कोचर और वेणुगोपाल धूत को गिरफ्तार भी किया था। हालांकि फिलहाल तीनों को कोर्ट से जमानत मिल गई है।

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