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'वॉचडाग को जांच से राहत नहीं', IL&FS फ्रॉड मामले में NCLT का बड़ा आदेश

आईएलएंडएफएस (IL&FS) में फर्जीवाड़े से जुड़े एक मामले में एनसीएलटी ने बड़ा फैसला सुनाया है जिसने ऑडिटर्स को झटका दे दिया है। एनसीएलटी का कहना है कि इनके खिलाफ भी जांच होगी और सिर्फ ऑडिटर्स होने के नाते ये बचाव का दावा नहीं कर सकती हैं। जानिए क्या है पूरा मामला और ट्रिब्यूनल के आदेश पर क्या कहना है इंडस्ट्री का

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Mar 26, 2026 पर 11:10 AM
'वॉचडाग को जांच से राहत नहीं', IL&FS फ्रॉड मामले में NCLT का बड़ा आदेश
NCLT का कहना है कि कंपनीज एक्ट के तहत फर्जीवाड़े के मामले में सिर्फ अंदरूनी ही नहीं, बाहरी पार्टीज की भी जांच हो सकती है।

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (IL&FS) मामले में ऑडिट फर्मों—डेलॉयट (Deloitte), बीएसआर एंड एसोसिएट्स एलएलपी (BSR & Associates LLP) और एसआरबीसी एंड कंपनी एलएलपी (SRBC & Co. LLP) के खिलाफ कार्यवाही जारी रखने की अनुमति दे दी है। इससे धोखाधड़ी के मामले में उनकी भूमिका की जांच का रास्ता साफ हो गया है। एनसीएलटी का कहना है कि इन्हें वॉचडॉग होने के चलते ही कार्रवाई के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता है। एनसीएलटी का यह फैसला कंपनीज एक्ट, 2013 के सेक्शन 339 के तहत चल रही कार्यवाही से जुड़ा है। यह मामला वर्ष 2018 में भारत सरकार की कंपनीज एक्ट, 2013 के सेक्शंस 241 और 242 के तहत शुरू की गई व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है, जो आईएलएंडएफएस और उसकी यूनिट्स में गवर्नेंस फेल्योर के बाद शुरू हुई थी।

'वॉचडॉग दायरे से बाहर नहीं'

एनसीएलटी का कहना है कि कंपनीज एक्ट के तहत फर्जीवाड़े के मामले में सिर्फ अंदरूनी ही नहीं, बाहरी पार्टीज की भी जांच हो सकती है। एनसीएलटी का कहना है कि इसके प्रावधान सिर्फ कंपनी के अंदरूनी लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि बाहरी पक्षों जैसे ऑडिटर्स पर भी लागू हो सकता है, अगर वे कथित धोखाधड़ी में शामिल या उसे बढ़ावा देने वाले पाए जाते हैं। ट्रिब्यूनल के मुताबिक ऑडिटर्स को आमतौर पर “वॉचडॉग” माना जाता है, लेकिन अगर यह पाया जाता है कि उन्होंने जानबूझकर धोखाधड़ी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, तो वे इम्युनिटी का दावा नहीं कर सकते।

आईएलएंडएफएस से जुड़े मामले में सरकार का शुरुआत से कहना था कि सेक्शन 339 का दायरा कंपनी के बिजनेस में धोखाधड़ी से जुड़े किसी भी व्यक्ति पर लागू होता है और ऑडिटर्स या अन्य किसी तीसरे पक्ष को शुरू में ही इससे बाहर नहीं किया जा सकता। सरकार के मुताबिक (SFIO) (सीरियस फ्रॉड इंवेस्टिगेशन ऑफिस) को जांच में मिले तथ्यों के आधार पर हर पक्ष के भूमिका की जांच अलग-अलग की जानी चाहिए। एनसीएलटी ने इस मान लिया।

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